ED रेड के दावे पर कोर्ट की सख्ती। करनैल सिंह के बयान मानहानि के दायरे में, ट्रायल तय
नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र जैन द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक करनैल सिंह के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले का संज्ञान लेते हुए अहम आदेश दिया है।
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने BNSS की धारा 227 के तहत करनैल सिंह के खिलाफ आगे की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि सत्येंद्र जैन और करनैल सिंह दोनों ने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में शकूर बस्ती सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में करनैल सिंह ने जीत दर्ज की थी, जबकि सत्येंद्र जैन को 20,998 मतों से हार का सामना करना पड़ा था।
क्या हैं मानहानि के आरोप
सत्येंद्र जैन ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रचार के दौरान करनैल सिंह ने उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए। आरोप है कि सिंह ने यह कहा कि वर्ष 2022 में ईडी की रेड के दौरान जैन के परिसर से 37 किलो सोना और 1100 एकड़ से अधिक की संपत्ति बरामद हुई थी। इसके अलावा एक इंटरव्यू में करनैल सिंह ने जैन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का भी आरोप लगाया था।
करनैल सिंह का पक्ष
अपने बचाव में करनैल सिंह ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने वही बातें कहीं, जो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध थीं और जिनका ज़िक्र ईडी से जुड़ी खबरों और बयानों में किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि मीडिया को बयान देते समय उन्होंने यह चेतावनी भी दी थी कि प्रकाशन से पहले तथ्यों का सत्यापन कर लिया जाए।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
शिकायत का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संज्ञान और नोटिस जारी करने के चरण में किसी भी आरोपी की मानसिक स्थिति (mens rea) पर फैसला नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मानहानि से जुड़े अपवादों पर विचार ट्रायल के दौरान किया जाएगा। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने बयान की जिम्मेदारी मीडिया पर नहीं डाल सकता।
अदालत ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति यह कहकर बच सकता है कि बयान को मानने से पहले श्रोता सत्यापन करें, तो मानहानि कानून केवल किताबों में ही रह जाएगा।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि जब सार्वजनिक हस्तियां एक-दूसरे पर आरोप लगाती हैं, तो उन्हें और अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
ED दस्तावेजों पर कोर्ट का रुख
अदालत ने कहा कि करनैल सिंह द्वारा अपने बचाव में जिन दस्तावेजों का हवाला दिया गया, वे सोशल मीडिया पर ईडी की पोस्ट और 2022 की रेड से जुड़ी खबरों पर आधारित थे।
कोर्ट ने पाया कि ईडी की पोस्ट में सोने का कुल वजन 1.80 किलो (133 सिक्के) बताया गया था और कहीं भी यह नहीं कहा गया कि बरामदगी सत्येंद्र जैन के घर से हुई थी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश पंचनामा में न तो नकदी, न सोना और न ही संपत्ति के दस्तावेज बरामद होने का ज़िक्र है।
अदालत ने टिप्पणी की कि यह जानकारी या तो आरोपी द्वारा स्वयं गढ़ी गई या जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई, क्योंकि दोनों नेता एक ही निर्वाचन क्षेत्र से आमने-सामने चुनाव लड़ रहे थे।
ट्रायल में तय होंगे अहम सवाल
कोर्ट ने कहा कि करनैल सिंह के बयान सीधे तौर पर सत्येंद्र जैन के व्यक्तिगत चरित्र को निशाना बनाते हैं और उनका समर्थन किसी आधिकारिक ईडी बयान या पब्लिक डोमेन की सामग्री से नहीं होता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह तय किया जाएगा कि आरोपी के बयान आपराधिक मानहानि के दायरे में आते हैं या नहीं यह सब ट्रायल का विषय होगा।



