वीडियो: कुर्सी की डोली पर टिका जीवन। पहाड़ के इस गांव में आज भी सड़क से पहले है संघर्ष, देखें….

कुर्सी की डोली पर टिका जीवन। पहाड़ के इस गांव में आज भी सड़क से पहले है संघर्ष, देखें….

नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले का महतोली गांव आज भी उस भारत की तस्वीर दिखाता है, जिसे 21वीं सदी के विकास के दावों से जोड़ा जाता है।

देखें वीडियो:-

ओखलकांडा ब्लॉक के इस गांव में आज भी न सड़क है, न एम्बुलेंस और न ही आपात चिकित्सा की कोई त्वरित सुविधा। यहां बीमार, बुज़ुर्ग और गर्भवती महिलाओं को कुर्सी से बनी डोली में बैठाकर युवाओं के कंधों पर कई किलोमीटर पैदल ढोना मजबूरी है।

महतोली ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांव आज भी मोटर मार्ग से कोसों दूर बसे हैं। ग्रामीणों को नजदीकी सड़क तक पहुंचने के लिए घने जंगलों, उबड़-खाबड़ रास्तों और खड़ी चढ़ाइयों को पार करना पड़ता है।

यह दूरी सामान्य दिनों में भी कठिन है, लेकिन जब गांव में अचानक कोई बीमार पड़ जाए तो यही रास्ता जानलेवा बन जाता है।

स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब किसी गर्भवती महिला को तत्काल इलाज की जरूरत होती है या कोई बुज़ुर्ग गंभीर रूप से बीमार हो जाता है।

हर बार गांव के युवाओं को इकट्ठा कर कुर्सी से बनी डोली तैयार की जाती है और मरीज को कंधों पर उठाकर घंटों पैदल चलना पड़ता है। कई बार युवाओं की कमी के कारण यह जिम्मेदारी और भी कठिन हो जाती है। इलाज में देरी के चलते कई मरीज अपनी जान तक गंवा चुके हैं।

हाल ही में महतोली गांव की एक बुज़ुर्ग आमा को अस्पताल पहुंचाने के लिए चार युवाओं को बुलाया गया। युवाओं ने आमा को डोली में बैठाकर कंधों पर उठाया और कई घंटे कठिन रास्तों से गुजरते हुए नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचाया।

रास्ते में कंधा देने वाले लोग बदले गए, ताकि समय रहते मरीज को सड़क तक पहुंचाया जा सके। इसके बाद आमा को वाहन से भीमताल और फिर हल्द्वानी रेफर किया गया।

डोली उठाते वक्त युवाओं के मुंह से निकले शब्द, “हम किस भारत में रह रहे हैं?”

यह सवाल केवल महतोली गांव का नहीं है, बल्कि पूरे पहाड़ी उत्तराखंड की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां आज भी विकास सड़कों तक पहुंचते-पहुंचते थम जाता है।

यह हालात सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं हैं। उत्तराखंड के कई दूरस्थ गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य और आपात सेवाओं से वंचित हैं। विकास के दावों के बीच पहाड़ का यह सच नीति निर्धारकों से जवाब मांग रहा है—कि आखिर इन गांवों तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधा कब पहुंचेगी?