बड़ी खबर: चमोली में गुलदार का कहर। मवेशियों के शिकार से गुस्साए ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बनाया बंधक

चमोली में गुलदार का कहर। मवेशियों के शिकार से गुस्साए ग्रामीणों ने वनकर्मियों को बनाया बंधक

रिपोर्ट- अमित भट्ट
चमोली जनपद के उजिटिया गांव में गुलदार के लगातार हमलों से ग्रामीणों का आक्रोश बुधवार को फूट पड़ा। मवेशियों के शिकार की सूचना के बावजूद वन विभाग की टीम के देर से मौके पर पहुंचने से नाराज ग्रामीणों ने एक फॉरेस्टर समेत छह वनकर्मियों को रस्सियों से बांधकर करीब दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।

मंगलवार देर रात उजिटिया निवासी राजेंद्र मेहरा की गोशाला में गुलदार घुस आया। हमले में एक गर्भवती गाय और दो साल के बछड़े की मौके पर ही मौत हो गई।

बुधवार सुबह जब राजेंद्र की पत्नी कस्तूरा देवी गोशाला पहुंचीं तो खून से लथपथ मवेशियों के शव देखकर गांव में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना फैलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए।

सूचना के बावजूद वन विभाग की देरी से भड़का आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई थी, लेकिन टीम सुबह करीब नौ बजे गांव पहुंची। इस देरी से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में भारी नाराजगी फैल गई।

आरोप है कि वन विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई करता है, जबकि गुलदार के हमलों से ग्रामीणों की आजीविका और सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी आक्रोश में ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची टीम को पकड़कर रस्सियों से बांध दिया।

“अल्मोड़ा में त्वरित कार्रवाई, यहां टालमटोल क्यों?”

ग्राम प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अल्मोड़ा जिले में ऐसी घटनाओं के बाद तुरंत पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ा गया, जबकि उजिटिया और आसपास के गांवों में अनुमति देने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

गुलदार के नरभक्षी होने की आशंका

पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में गुलदार का खौफ बना हुआ है। जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने आशंका जताई कि गुलदार नरभक्षी हो सकता है।

हाल के दिनों में भंडारीखोड में तीन गायों का शिकार, उजिटिया में दिनदहाड़े पालतू कुत्ते पर हमला और रंगचौणा गांव में गोशाला के भीतर गाय के शिकार जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वहीं कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में भी बीते एक सप्ताह में कई मवेशियों के मारे जाने की खबरें हैं।

आश्वासन के बाद खत्म हुआ गतिरोध

करीब दो घंटे तक चले तनाव के बाद जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि डीएफओ से वार्ता हो चुकी है और बुधवार शाम तक गुलदार को पकड़ने के लिए गांव में पिंजरा लगाया जाएगा। ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए सभी वनकर्मियों को रिहा किया।