बिग ब्रेकिंग: देहरादून में बिल्डर दंपती पर एक और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

देहरादून में बिल्डर दंपती पर एक और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

  • इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट में 75.51 लाख की ठगी, पत्नी समेत फरार शाश्वत गर्ग पर शिकंजा

रिपोर्ट- अमित भट्ट
देहरादून से करोड़ों रुपये समेटकर परिवार सहित फरार हुए बिल्डर शाश्वत गर्ग और उसकी पत्नी साक्षी गर्ग की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

आर्केडिया हिलॉक्स प्रोजेक्ट के बाद अब थानो क्षेत्र स्थित इंपीरियल वैली प्लॉटिंग परियोजना में भी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में रानीपोखरी थाना पुलिस ने गर्ग दंपती समेत उनके पार्टनर विकास ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

यह मुकदमा प्रेमनगर क्षेत्र के भूड़ गांव निवासी रीना पाल की तहरीर पर दर्ज किया गया है। आरोप है कि तीनों आरोपियों ने प्लॉट बेचने के नाम पर रीना पाल से 75.51 लाख रुपये की ठगी की, लेकिन रकम लेने के बावजूद प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। इसके बाद से ही गर्ग दंपती फरार बताए जा रहे हैं।

प्लॉट बिक्री के नाम पर ठगी का आरोप

पीड़िता के अनुसार, थानो क्षेत्र में चल रही इंपीरियल वैली परियोजना में उन्होंने भूमि खाता संख्या 18 (फसली वर्ष 1422 से 1427), खसरा संख्या 202ग, प्लॉट संख्या 36 (रकबा 208.34 वर्गमीटर), मौजा ककनावा मयचक तल्ली, परगना परवादून, तहसील डोईवाला में प्लॉट बुक कराया था।

यह सौदा भूमि के वास्तविक स्वामी और गर्ग दंपती की फर्म असगर टेक्सटाइल के पार्टनर विकास ठाकुर (निवासी शास्त्रीनगर, देहरादून) के माध्यम से कराया गया था।

आरोप है कि खरीदारों को भरोसे में लेने के लिए असगर टेक्सटाइल के जरिए लेआउट तैयार कर एमडीडीए से स्वीकृति ली गई और परियोजना को उत्तराखंड रेरा में पंजीकरण संख्या UKREP04250000631 के तहत दर्ज कराया गया।

कैसे हुआ 75.51 लाख का लेन-देन

  • एफआईआर के अनुसार, प्लॉट का कुल सौदा मूल्य 75.51 लाख रुपये तय हुआ।
  • 35.51 लाख रुपये नगद रूप से स्वयं रीना पाल और अन्य लोगों की मदद से आरोपियों को दिए गए।
  • शेष 40 लाख रुपये का बैंक ऋण भारतीय स्टेट बैंक से लिया गया।
  • बैंक द्वारा 20-20 लाख रुपये के दो डीडी बनाए गए—एक विकास ठाकुर के नाम और दूसरा असगर टेक्सटाइल के नाम।

इसके अलावा, पीड़िता ने 06 सितंबर 2023 को 1,68,800 रुपये का स्टांप शुल्क भी जमा किया, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री नहीं कराई गई।

रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल

आरोप है कि आरोपी लंबे समय तक रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल करते रहे और अंततः कोई भी विक्रय पत्र पीड़िता के पक्ष में संपादित नहीं कराया गया। एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी बाहुबली और भूमाफिया किस्म के व्यक्ति हैं, जिन्होंने पीड़िता की गाढ़ी कमाई हड़प ली।

पहले से दर्ज हैं गंभीर मामले

गौरतलब है कि इससे पहले आर्केडिया हिलॉक्स प्रोजेक्ट में 21 फ्लैटों के आवंटन में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में भी गर्ग दंपती, उनके स्वजनों, परिचितों और कुछ वित्तीय संस्थाओं पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

पुलिस ने गर्ग दंपती के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं और उनके नेपाल फरार होने की आशंका जताई जा रही है। आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है।