उत्तराखंड में नक्शा पास प्रक्रिया आसान। अब कम जोखिम वाले भवनों को आर्किटेक्ट ही करेंगे मंजूर
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने Ease of Doing Business को बढ़ावा देते हुए भवन नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब कम जोखिम वाले भवनों के नक्शे को मान्यता प्राप्त आर्किटेक्ट स्वयं स्वीकृत कर सकेंगे।
इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
क्या बदला नियम?
अब तक भवन मानचित्र स्वीकृति के लिए कई विभागों, कागजी कार्रवाई और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। नई प्रणाली में:
- कम जोखिम वाले भवनों के नक्शे आर्किटेक्ट स्वयं मंजूर कर सकेंगे।
स्वीकृति के लिए दो जरूरी प्रमाणपत्र होंगे:
- SC-1: आर्किटेक्ट/इंजीनियर का प्रमाण कि नक्शा सभी नियमों के अनुरूप है।
- SC-2: स्ट्रक्चरल इंजीनियर का प्रमाण कि भवन संरचनात्मक रूप से सुरक्षित है।
नक्शा मंजूर होने के बाद आर्किटेक्ट को सिर्फ संबंधित प्राधिकरण को सूचना देनी होगी।
15 दिन में स्वचालित मंजूरी
नई व्यवस्था के अनुसार, आर्किटेक्ट द्वारा सूचना भेजे जाने के बाद यदि 15 दिनों तक कोई आपत्ति नहीं आती, तो इसे स्वचालित मंजूरी माना जाएगा। इसके बाद आवेदक निर्माण कार्य शुरू कर सकता है।
क्या होगा फायदा?
- नक्शा पास कराने में लगने वाला समय काफी कम होगा।
- सरकारी दफ्तरों के चक्कर और अनावश्यक बाधाएं घटेंगी।
- प्रक्रिया पारदर्शी होगी और भ्रष्टाचार में कमी आएगी।
- छोटे मकानों और कम जोखिम वाले भवनों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
- निर्माण कार्यों में तेजी आएगी, जिससे आम जनता और बिल्डरों दोनों को लाभ होगा।
सरकार का यह कदम उत्तराखंड में निर्माण से जुड़े कार्यों को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।



