शाश्वत गर्ग के लापता होने के बाद RERA सख्त, प्लॉट बिक्री पर रोक
रिपोर्ट- अमित भट्ट
देहरादून के बिल्डर शाश्वत गर्ग पिछले 20 दिनों से अपने पूरे परिवार के साथ लापता हैं। इस बीच उनके इंपीरियल वैली (प्लॉटेड डेवलपमेंट) प्रोजेक्ट पर रेरा ने बिक्री पर रोक लगा दी है।
रेरा के प्रभारी अध्यक्ष अमिताभ मैत्रा ने यह आदेश उस शिकायत के बाद जारी किया, जिसमें निवेशक कमल गर्ग ने बताया कि उन्होंने इस परियोजना में 40 लाख रुपये निवेश किए हैं और बिल्डर के लापता होने के बाद पावर ऑफ अटॉर्नी रखने वाला व्यक्ति प्लॉट बेच सकता है।
रेरा ने परियोजना में किसी भी तरह की खरीद-बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से बिक्री का पूर्ण रिकॉर्ड तलब किया है, ताकि परियोजना की स्थिति स्पष्ट की जा सके।
जानकारी के अनुसार, शाश्वत गर्ग ने असगर टेक्सटाइल नाम की फर्म के माध्यम से थानो क्षेत्र में इंपीरियल वैली प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस फर्म में उनकी पत्नी साक्षी गर्ग और विकास ठाकुर पार्टनर हैं। परियोजना का रेरा रजिस्ट्रेशन अप्रैल 2025 में कराया गया था। शाश्वत ने परियोजना की पावर ऑफ अटॉर्नी विकास ठाकुर के पास दे रखी है।
शाश्वत गर्ग, उनकी पत्नी साक्षी, सास-ससुर अंजली और प्रवीन, तथा बेटा रिद्वान 16 अक्टूबर की रात हापुड़ स्थित विवेक विहार (राधापुरी) में साक्षी के भाई सुलभ गोयल के घर पहुंचे थे।
अगले दिन 17 अक्टूबर को दोपहर बाद वे देहरादून लौटने की बात कहकर निकले, लेकिन इसके बाद से परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ।
बताया गया कि शाश्वत ने भाई दूज पर वापस आने का संदेश भेजा था। परिवार हर साल दीपावली पर बदरीनाथ और केदारनाथ दर्शन के लिए जाता रहा है, लेकिन इस बार उनका कोई अता-पता नहीं है। परिजनों के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों के फोन भी बंद हैं।
सुलभ गोयल ने हापुड़ कोतवाली में तहरीर देकर आशंका जताई है कि कहीं परिवार के साथ कोई अनहोनी न हो गई हो।
गर्ग परिवार दो गाड़ियों—हुंडई क्रेटा (UK07FK0018) और हुंडई ट्यूसॉन (UK07FL9369)—से सफर कर रहा था। इस घटना के बाद प्रोजेक्ट से जुड़े लोग दहशत और आशंका के माहौल में हैं।
कुछ इसे पुष्पांजलि बिल्डर मामले की तरह किसी बड़े स्कैम से भी जोड़कर देख रहे हैं। ऐसे ही संदेह और अनिश्चितता को देखते हुए रेरा ने परियोजना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाकर सावधानी बरती है।


