दीपावली पर वायु प्रदूषण पर सख़्त निगरानी। अब थर्ड पार्टी एजेंसी भी रखेगी पर्यावरण की सेहत पर नज़र
देहरादून। दीपावली का त्योहार रोशनी के साथ-साथ वायु प्रदूषण की चुनौती भी लेकर आता है। हर साल की तरह इस बार भी पटाखों के अत्यधिक उपयोग से प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अलर्ट मोड पर आ गया है।
खास बात यह है कि इस बार प्रदूषण नियंत्रण के काम में थर्ड पार्टी एजेंसी को भी शामिल किया गया है, जो राज्यभर में वायु गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करेगी।
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि दीपावली से पांच दिन पहले और पांच दिन बाद तक वायु गुणवत्ता पर सघन निगरानी रखी जाए।
उत्तराखंड में इसके तहत राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु प्रदूषण के स्तर की सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है ताकि प्रदूषण में अचानक वृद्धि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
थर्ड पार्टी भी करेगी निगरानी
इस बार केवल बोर्ड ही नहीं, बल्कि एक थर्ड पार्टी एजेंसी भी वायु गुणवत्ता का परीक्षण करेगी। यह एजेंसी राज्य के विभिन्न शहरों में प्रदूषण के स्तर की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
इस दौरान चार प्रमुख मानकों पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
राज्यभर के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन पहले से सक्रिय कर दिए गए हैं। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जिलाधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जाएंगे।
सड़कों पर छिड़काव और ग्रीन पटाखों पर ज़ोर
नगर निगमों को सड़कों और निर्माण स्थलों पर नियमित पानी का छिड़काव करने के आदेश दिए गए हैं ताकि धूल के कणों को नियंत्रित किया जा सके।
वहीं, पटाखों की बिक्री और उनके मानकों की जांच के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस बार टिहरी को भी प्रदूषण निगरानी के दायरे में शामिल किया गया है। इसके अलावा देहरादून की दो जगहों, ऋषिकेश की एक साइट, और काशीपुर में भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्टेशन सक्रिय हैं।
प्रदूषण मुक्त दीपावली की अपील
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के प्रमुख शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार देखा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दीपावली के दौरान यह सुधार प्रभावित न हो।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ग्रीन पटाखों का प्रयोग करें और प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ दीपावली मनाएं।
“प्रकृति की सेहत हमारी जिम्मेदारी है-इस दीपावली रोशनी जलाएं, धुआं नहीं।”



