गजब: बजट खर्च में उत्तराखंड वन विभाग हुआ फिसड्डी साबित। 6 महीने में खर्च हुआ सिर्फ 29%

बजट खर्च में उत्तराखंड वन विभाग हुआ फिसड्डी साबित। 6 महीने में खर्च हुआ सिर्फ 29%

देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग बजट खर्च करने के मामले में लगातार पिछड़ता नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आधे साल गुजरने के बाद भी विभाग अपने आवंटित बजट का केवल 29 फीसदी ही खर्च कर पाया है। यह स्थिति तब है, जबकि शासन स्तर पर करोड़ों की धनराशि समय पर जारी कर दी गई थी।

जारी और खर्च बजट का अंतर

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में वन विभाग को राज्य सेक्टर, केंद्र प्रायोजित योजनाओं और बाह्य सहयोगित परियोजनाओं के लिए 1193 करोड़ रुपए (11930061 हजार रुपए) स्वीकृत हुए।

इनमें से शासन ने अब तक 801 करोड़ रुपए (8016724 हजार रुपए) जारी कर दिए हैं, लेकिन विभाग केवल 344 करोड़ रुपए (3438868 हजार रुपए) ही खर्च कर पाया है।

सबसे बड़ा हिस्सा कैंपा फंड (CAMPA) का है। इस मद में विभाग को 1608 करोड़ रुपए मिले, जिसमें से 1071 करोड़ रुपए जारी भी कर दिए गए। बावजूद इसके विभाग केवल 376 करोड़ रुपए ही खर्च कर सका। यानी कुल आवंटन का सिर्फ 23 फीसदी।

योजनावार खर्च का हाल

  • आर्थिक एवं सामाजिक विकास: स्वीकृत – 653.95 करोड़ | खर्च – 270.38 करोड़ (27%)
  • वन्यजीव सुरक्षा एवं प्रबंधन: स्वीकृत – 101.40 करोड़ | खर्च – 30.48 करोड़
  • वनीकरण एवं संरक्षण: स्वीकृत – 6.34 करोड़ खर्च – 1.52 करोड़
  • संस्थान एवं अन्य कार्य: स्वीकृत – 22.33 करोड़ खर्च – 6.67 करोड़
  • जैव विविधता एवं पर्यावरण विकास: स्वीकृत – 16 करोड़ खर्च बेहद कम

इसी तरह एससी/एसटी योजनाओं में 31.30 करोड़ रुपए मिले, लेकिन खर्च सिर्फ 3.66 करोड़ रुपए ही हो पाया।

विभाग का तर्क

वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) समीर सिन्हा का कहना है कि फिलहाल बरसात का मौसम होने के कारण खर्च का बड़ा हिस्सा पौधारोपण में ही संभव हो पाता है। बाकी निर्माण और मरम्मत से जुड़े कार्य इस दौरान बाधित रहते हैं। उनका दावा है कि अक्टूबर से खर्च की गति बढ़ेगी।

जानकारों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर बजट जारी होने के बावजूद विभाग की ओर से खर्च में सुस्ती गंभीर चिंता का विषय है। इसका सीधा असर वन संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन और पर्यावरण विकास जैसे अहम प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है। अगर आने वाले महीनों में विभाग ने तेजी नहीं दिखाई तो वित्तीय वर्ष के अंत तक बड़ा हिस्सा अनुपयोगी ही रह जाएगा।

गौरतलब है कि, आंकड़े साफ बताते हैं कि उत्तराखंड वन विभाग योजनाओं पर खर्च करने में बुरी तरह पिछड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार को सीधे हस्तक्षेप करना होगा, ताकि बजट का लाभ केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिख सके।