उत्तराखंड में बारिश का कहर। भूस्खलन और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त
उत्तराखंड में भारी बारिश और आपदाओं का सिलसिला लगातार जारी है। नैनीताल जिले के काठगोदाम–रानीबाग–भीमताल मुख्य मार्ग पर स्थित भीमताल पुल के समीप शुक्रवार सुबह पहाड़ी से मलबा आने के कारण मार्ग बंद हो गया।
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इस दौरान दोनों ओर लंबा जाम लग गया और यात्रियों को ज्यूलिकोट, गेठिया व भूमियाधार होते हुए लंबा मार्ग तय करना पड़ा। यह मार्ग भीमताल के स्कूलों के बच्चों, सरकारी कर्मचारियों, पर्यटकों और ग्रामीण यात्रियों की आवाजाही का शॉर्टकट है।
मौके पर काठगोदाम पुलिस और लोक निर्माण विभाग की टीम पहुंची और मार्ग से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया।
इधर, रुद्रप्रयाग, चमोली और टिहरी जनपद में बादल फटने की घटनाओं से हड़कंप मच गया। चमोली जिले के देवाल ब्लॉक में बादल फटने से दो लोग लापता हो गए, जबकि दो घायल बताए जा रहे हैं। घटना में करीब 20 मवेशी मलबे में दब गए।
मोपाटा गांव में तारा सिंह और उनकी पत्नी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि विक्रम सिंह और उनकी पत्नी घायल हुए हैं। कई घरों और गोशालाओं के मलबे में दबे होने की भी आशंका जताई गई है। हालात को देखते हुए चमोली जिले के सभी ब्लॉकों में शुक्रवार को अवकाश घोषित कर दिया गया है।
टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली गांव में भी बादल फटने की घटना हुई, हालांकि यहां किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। रुद्रप्रयाग जिले में भी कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। उन्होंने आपदा सचिव और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रभावित परिवार को तत्काल मदद पहुंचाई जाए।
मौसम विभाग ने 29 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट और शेष प्रदेश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। अगले दो दिन उत्तराखंड में कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है।