DBUU के फाइन आर्ट्स विभाग में भित्ति चित्रण कार्यशाला। वैल्यू-ऐडेड मॉड्यूल के तहत रचनात्मकता और नवाचार का संगम
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, देहरादून के ललित कला विभाग में 4 से 8 अगस्त 2025 तक “Brushstrokes of Innovation: Startup Expressions in Fine Arts” विषय पर भव्य वॉल पेंटिंग वर्कशॉप का आयोजन हुआ।
हिंदी भावार्थ “नवाचार की तूलिकाएँ: ललित कला में स्टार्टअप अभिव्यक्तियाँ” यह संदेश देता है कि कला केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक सरोकारों का भी सशक्त माध्यम है।
यह आयोजन वैल्यू-ऐडेड मॉड्यूल के तहत सम्पन्न हुआ, जिसका उद्देश्य छात्रों को नियमित पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर अतिरिक्त कौशल, व्यावहारिक अनुभव और व्यक्तित्व विकास के अवसर प्रदान करना है।
उद्घाटन सत्र में अधिष्ठाता प्रो. भावना गोयल, प्रो. अजय चतुर्वेदी, प्रो. शालिनी बोहरा, डॉ. सुनीता भोला, डॉ. मोनिका नेगी और डॉ. विक्रम मौजूद रहे। प्रो. गोयल ने कहा कि इस तरह के सामूहिक कला-प्रयास टीमवर्क, संवाद कौशल और रचनात्मक सोच को विकसित करते हैं।
प्रो. चतुर्वेदी ने वॉल पेंटिंग को “संस्थान की सांस्कृतिक पहचान का स्थायी दस्तावेज” बताया। प्रो. बोहरा ने सतत विकास और कला के पर्यावरणीय दृष्टिकोण पर जोर दिया।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजकुमार पांडेय ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। संयोजक डॉ. मंतोष यादव ने छात्रों को कला के व्यावसायिक अवसरों से अवगत कराया।
इसके अलावा राहुल यादव, शमशेर वारसी, दीपशिखा मौर्य, अरिहंत भाटिया, शालिनी भंडारी, सौम्या रावत और श्रेया द्विवेदी ने डिजिटल आर्ट, पारंपरिक चित्रण और लोककला की विशेषताओं पर कार्यशालाएं लीं।
विद्यार्थियों की कलाकृतियों में पौराणिक कथाओं, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संदेशों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला। छात्रों ने कहा कि इस तरह के आयोजन से उनकी रचनात्मकता, टीमवर्क और दृष्टिकोण में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जो नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है।
अंत में, यह वर्कशॉप केवल कला-अभ्यास न रहकर, नवाचार, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक चेतना का जीवंत उदाहरण बनी। विश्वविद्यालय का यह प्रयास वैल्यू-ऐडेड लर्निंग के महत्व को रेखांकित करता है और भविष्य के लिए प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत करता है।