Exclusive: कांग्रेस को मिला राजनीतिक मुद्दा भुनाने का मौका

कांग्रेस को मिला राजनीतिक मुद्दा भुनाने का मौका

 

– जहरीली शराब कांड कांग्रेस की ही देन

देहरादून। राजधानी देहरादून के पथरिया पीर में जहरीली शराब पीने से हुई सामूहिक मौत के दौरान मरने वालों के घरों पर उनका दुख बांटने के बहाने अपना राजनीतिक वोट बैंक सेकने के लिए कभी हरीश रावत, कभी प्रीतम सिंह खूब तैयारियों में नज़र आये। आखिर करें भी क्यों न बड़े दिनों बाद कोई राजनीतिक मुद्दा भुनाने का मौका जो मिला है। मगर क्या वाकई सब ऐसा है।जैसा कांग्रेस दिखाने की कोशिश कर रही है।

 

 

हरीश ने मृतकों के परिजनों को कहा कि, ऐसे लोगों के खिलाफ घर से निकलना पड़ेगा जो लोग जहरीली शराब बिकवा रहे हैं। क्योंकि, यह काम बिना राजनीतिक संरक्षण के नहीं हो सकता है। आखिर सत्ता के लोग मोन क्यों है? राज्य सरकार इस प्रकरण पर चुप्पी क्यों साध रखी है? हरीश के इस बयान से पहले ये बाते जान लेनी चाहिए थी कि, शराब कांड का आरोपी अजय सोनकर उर्फ घोंचू कई सालों से शराब बेचता आ रहा है। शराब माफिया रहते हुवे वह सबसे पहले निर्दलीय पार्षद बना।

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अपने मलीन बस्तियों की वोट बैंक को जाता देख कांग्रेस ने ही घोंचू को कांग्रेस में आने का न्योता दिया। और अब निर्दलीय घोंचू कांग्रेस के हो चले। वह कई सालों तक कांग्रेस के पार्षद रहे। धीरे-धीरे मलिन बस्तियों में घोंचू का नाम बजने लगा और वो विधानसभा के समय कांग्रेस से विधायक का टिकट मांगने लगे। मगर उस समय के सिटिंग विधायक राजकुमार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के काफी करीबी होने का लाभ मिला, और अजय सोनकर उर्फ घोंचू को टिकट नहीं मिल पाया। इसके बाद घोंचू ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधायक का चुनाव लड़ा और खूब मलिन बस्तियों के वोटों को काटा।

 

 

 

इसका नतीजा यह हुआ कि, वहां के सिटिंग विधायक राजकुमार को भारी बहुमत से हार का सामना करना पड़ा। उसके बाद घोंचू भाजपा में शामिल हो गया और अपनी पत्नी को भाजपा से पार्षद का चुनाव लड़ाया। मगर अहम प्रश्न यह रह जाता है कि, जो चीख-चीख कर भाजपा पे आज इल्ज़ाम लगा रखी है, तो उस वक्त निर्दलीय पार्षद घोंचू को उन्होंने क्यों कांग्रेस में आने का मौका दिया था। क्यों पार्षद के टिकट पर घोंचू को चुनाव लड़ाया?

 

 

 

आखिर क्या उस समय कांग्रेस को नजर नहीं आ रहा था। अगर उस समय भी इस प्रकार की बड़ी वारदात कोई हो जाती तो उसके लिए क्या बीजेपी जिम्मेदार होती? आखिर कांग्रेस का पाला हुआ जब कांग्रेस को ही डसने लगा तो कांग्रेस ने सारा ठीकरा सिर्फ बीजेपी पर ही छोड़ दिया। शराब कांड में मरे हुए लोगों की मौत में दोषी आखिर हम कांग्रेस को भी क्यों ना माने। कांग्रेस भी इन मौतों की बराबर की हकदार है।