आम नागरिकों की सुरक्षा पर जन सम्मेलन

देहरादून। 15 जुलाई को हिंदी भवन में एक जन सम्मलेन आयोजित किया गया था। सम्मलेन में CPI, CPI(M), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI(ML), उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, चेतना आंदोलन, उत्तराखंड महिला मंच, जन संवाद समिति, उत्तराखंड पीपल्स फोरम एवं कई दलों एवं जन संघटनों से प्रतिनिधि शामिल रहे। सम्मलेन में वक्ताओं का कहना था कि, उत्तराखंड में गरीबों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। आम लोगों के हक़, कानून का राज और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में हैं। ख़ास तौर पर जबसे भाजपा सत्ता में आयी है, तब से खतरें बढ़ते जा रहा हैं।

 

गरीबी तब हट सकटी है जब आम लोग आपने श्रम से अपने घरों को चला पाएंगे। लेकिन केंद्र और राज्य स्तर पर भाजपा सरकारें लगातार मज़दूरों के अधिकार को छीनने के लिए कोशिश कर रहे हैं। श्रम कानून को कमज़ोर करने के लिए केंद्रीय सरकार प्रयास कर रही है। राज्य में श्रम कानून, श्रमिक के लिए कल्याणकारी योजनाएं को अमल में भरस्टाचार, उपेक्षा एवं लापरवाई दिख रहा है।

 

वक्ताओं ने कहा कि, लोगों के वन अधिकार को मान्यता देने के बजाय, उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। बड़े बाँध और बडी परियोजनाओं के नाम पर कानून का उलंगन किया जा रहा है। केंद्र में भाजपा सरकार भारतीय वन कानून में संशोदन लाना चाह रही है, जिसके अंतर्गत वन विभाग को गोली मारने का अधिकार और लोगों के अधिकार को खत्म करने के लिए अधिकार मिल जायेगा। शताब्दियों से उत्तराखंड के आम लोगों ने राज्य के जंगलों एवं नदियों की रक्षा कि हैं, जिसकी वजह से आज पूरे उत्तर भारत को पानी मिलता है। लेकिन राज्य सरकार केंद्र की नीतियां पर कोई आवाज़ नहीं उठा रही है, ना ही लोगों के हकों को सुरक्षा दे रही है।जन सम्मेलन

जबसे भाजपा सत्ता में आयी है, तबसे भीड़ की हिंसा को अंजाम दिया जाता रहा है। राज्य में पहली बार 2017 और 2018 में सतपुली, मंसूरी, आराघर, कीर्तिनगर, हरिद्वार, रायवाला, कोटद्वार, चम्बा, अगस्तमुनि, घनसाली, और अन्य जगहों में दंगा फैलाने की कोशिश की गयी। ख़ास तौर पर समुदाय विशेष के लोगों पर आरोप लगा कर भीड़ द्वारा उन पर हमले किये गये। इस साल भी देहरादून में ही हिंसा हुई है। ख़ास तौर पर राष्ट्रवाद और धर्म के नाम पर गुंडागर्दी को अंजाम दिया जा रहा है।

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वक्ताओं ने यह भी कहा कि, लोक सभा चुनाव के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर बहुत सारे सवाल उठाये गए थे। बिना निगरानी मशीनों को शिफ्ट किया गया। VVPAT के स्लिप को EVM के रिजल्ट से तुलना करने के लिए चुनाव आयोग तैयार नहीं हुआ, आयोग के मतदाताओं के आकड़े में अस्पष्टता एवं फरक दिख रहा है। इन सारे सवालों पर ना चुनाव आयोग से ना ही सरकार से कोई स्पष्ट जवाब मिला है। ऐसे लगता है की देश का लोकतंत्र खतरा में है।

 

वक्ताओं में उत्तराखंड परिवर्तन पारी से PC तिवाड़ी, उत्तराखंड महिला मंच से निर्मला बिष्ट, चेतना आंदोलन से शंकर गोपाल, उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, समाजवादी पार्टी से डॉ एस एस सचान, जन संवाद समिति से सतीश धौलखंडी, उत्तराखंड पीपल्स फोरम से जयकृत कंडवाल, राष्ट्रीय सेवा दल से जब्बर सिंह, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति से विजय भट्ट, नईम कुरैशी, आदि शामिल रहे। कार्यक्रम में डॉ जीतेन भारती, सुनीता,अशोक, पप्पू, प्रभु पंडित, राजेश, विजय पाल, कल्पना बहुगुणा आदि शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता CPI (M) के वरिष्ठ नेता बच्ची राम कंसवाल और संचालन भार्गव चंदोला ने किया।