प्राधिकरण सजा रहा भूमाफियाओं के सर पर ताज

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देहरादून। प्राधिकरण की हिलाहवाली से आम आदमी परेशान तो है ही, पर प्राधिकरण की आनाकानी हर बार क्यों होती है यह कोई नहीं जानता? वैसे तो आनाकानी की मंशा भलीभांति समझ आती है, पर एमडीडीए के अधिकारी इतने ढीठ हैं कि अपने आप को सही साबित करने मे कोई कसर नहीं छोड़ते। प्राधिकरण की आनाकानी हर बार हर काम मैं इसीलिए होती है, क्योंकि, प्राधिकरण के आलाधिकारी बिलोटे के जैसे मलाई चट कर ऐसे बैठे होते है जैसे उन्हें कानों कान खबर ही न हो कि मलाई कौन चट कर गया। आखिर ऐसा है भी तो क्यों? आपको बतादें वो सिर्फ इसलिए क्योंकि, आज के समय पर हर आदमी एक पदाधिकारी बनना तो चाहता है पर जनता के हित में काम हो या न हो इससे उसे कोई मतलब नहीं है।

एक ऐसा ही दृश्य ब्राइट पोस्ट के संज्ञान में आया है जिसमें दिल्ली के निवासी गौतम सेठ का कहना है कि, कुछ भूमाफियाओं ने एमडीडीए की मिली भगत से उनकी 8 बीघा जमीन को हड़प कर लिया है। गौतम का कहना है कि, इस पूरे प्रकरण में उन भूमाफियाओं की एमडीडीए और बिजली विभाग ने पूरी मदद की है। क्योंकि, जब-जब दिल्ली निवासी ने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई तब तब उन्हें न तो कोई आश्वासन मिला और न ही कोई मदद। दिल्ली निवासी गौतम सेठ ने बताया कि, करीब 2010 में उनके पास वहीं के दो लोकल निवासी पहुंचे जिनका नाम बलवंत सिंह और बलवीर सिंह है। उन्होंने कहा कि, हम इस जमीन पर आपको 2-3 कमरे का एक छोटा सा भवन निर्माण करके देंगे क्योंकि, आप अक्सर दिल्ली से यहाँ आते है तो आपके रुकने के लिए अपनी एक जगह हो जाएगी। इस बात पर गौतम भी मान गए, लेकिन कुछ समय बाद जब उन्हें कुछ एतराज हुआ और भवन निर्माण में कुछ रुकावटें आना शुरू हुई तो गौतम ने काम बंद करा दिया।  दो-तीन साल बाद करीब 2012 में फिर से बलवंत सिंह और बलवीर सिंह उनके पास पहुँचे।

उन्होंने मुझसे कहा कि, हम इसमें कंस्ट्रक्शन को दोबारा करके देंगे। अब धीरे-धीरे इन दोनों भू-माफियाओं ने उस जमीन पर 7 माइलस स्टोन के नाम से एक रेस्टोरेंट बना लिया जो 2013 या 2014 में बनाया गया। उस वक्त यह एमडीडीए से मिले और एमडीडीए की मिलीभगत से ही वहां पूरा भवन निर्माण हो गया। जो कि अवैध निर्माण है। क्योंकि, वहां कोई नक्शा पास नहीं है और ना ही किसी के भी पास किसी निर्माण की कोई अनुमति है। लेकिन मिलीभगत से ही वहां आज एंपायर खड़ा हो गया। गौतम सेठ ने यह भी बताया कि, हमारा खसरा नंबर 2824 है जो 8 बीघा जमीन का है। मुख्य मसूरी मार्ग पर है, उसके ठीक पीछे इन्होंने खसरा नंबर 2823 के किसी को 10-20 हजार देकर एक फर्जी कागज बना लिए और अपने आप को 2823 नंबर खसरे का मालिक बताने लगे।  इन्होंने डॉली थपली पत्नी बलवीर सिंह और मनीषा जाधवान पत्नी बलवंत सिंह के नाम से कागज बनवाए। मुझसे भी उन्होंने इसके एवज में 5 लाख रुपए ले लिए जिसमें दो लाख नगद और तीन लाख के चेक लिए गए। वह चेक बलवंत सिंह और बलवीर सिंह ने इसलिए लिए क्योंकि, वह मेरे मकान को कंप्लीट करके देंगे और 3 बीघा की रजिस्ट्री करा कर देंगे।

मैं उस पर भी राजी हो गया क्योंकि मैं दिल्ली से यहां आता था, यहां रुकता था, तो कभी कोई मिलता था कभी नहीं। इन दोनों साथियों ने लूट मचा रखी है। इन दोनों पर दो-तीन केस और दर्ज हैं। जो कि दूसरों की जमीन को कब्जा करके वहां बने हुए हैं। अब प्रशासन इनके साथ है बिजली विभाग इनके साथ है क्योंकि बिजली विभाग ने वहां मीटर भी लगा रखा है जबकि कागजों के हिसाब से जो मीटर लगा है वह खसरा नंबर 2823 पर दर्शाता है और मौके पर जो मीटर है वह खसरा नंबर 2824 पर लगा हुआ है। ऐसे ही वह दोनों कंस्ट्रक्शन खसरा नंबर 2823 पर दिखा रहे हैं, जबकि मौके पर जो निर्माण हुआ है वह खसरा नंबर 2824 पर हुआ है जो कि मेरा है। मेरे साथ इतने समय से ज्यादती हो रही है। पिछले पांच-छह सालों से मैं प्रशासन से गुहार लगा रहा हूं। किसी भी जगह से मुझे कोई मदद नहीं मिल रही है। मैंने पीएमओ में कंप्लेंट की, गवर्नर को पत्र लिखा, सीएम को पत्र लिखा, एमएलए को पत्र लिखा, सब जगह मदद की गुहार लगाई डीजीपी और एसआईटी में भी कंप्लेंट की लेकिन कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली ना हमारी कोई सुनवाई हो रही है।

गौतम ने यह भी कहा कि, मैंने जब एमडीडीए के वीसी आशीष श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने कहा कि, 2017-18 में एक केस इनके खिलाफ रजिस्टर हुआ था वह भी इन्होंने 5 फीट जगह बनाई हुई है जिसमें छोटे से एरिया का सीलिंग का ऑर्डर भी हुआ था। लेकिन बाद में वीसी ने कहा कि, वह 6 हफ्ते का  स्टे ले आए हैं। वह भी इसलिए कि, एमडीडीए उनको रिपोर्ट दे की इसमें नक्शा पास है या नहीं। मेरा यह कहना और मानना है कि बिना नक्शे पास के हाई कोर्ट इनको लोगों को स्टे कैसे दे सकता है। मेरी समझ से यह बिल्कुल बाहर है। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि, मेरी जगह मुझे वापस दिलाई जाए और जो अवैध निर्माण हुआ है इसको दधाराशाही किया जाए ताकि कोई और व्यक्ति पहाड़ों की खूबसूरती को नष्ट न कर सके।  इसके लिए मैंने एनजीटी में भी कंप्लेंट की है और उनसे मेरा निवेदन है कि, पॉल्युशन को रोका जाए और जो अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन है उसको तोड़ा जाए ताकि मसूरी की सुंदरता बनी रहे।

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