उत्तरकाशी के सहायक अभियंता की जांच शक के दायरे में

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उत्तरकाशी के सहायक अभियंता की जांच शक के दायरे में

 

देहरादून। उत्तरकाशी नोगांव के लघु सिंचाई विभाग के
सहायक अभियंता गुरदेव सिंह पर चल रहे अपनी विभागीय कर्मचारी कुमारी रैना देवी के यौन शोषण वाले मामले में अब गुरदेव पर 3 दिन पहले पुरोला थाने में FIR दर्ज हो गयी है।

 

पाठकों को बता दें कि, महिला की शिकायत मिलने पर उत्तराकाशी जिला अधिकारी महोदय के आदेश से आंतरिक शिकायत समिति द्वारा इसकी जांच की गई और जांच में गुरदेव सिंह को उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारियों के आचरण नियमावली 2002 के नियम (3) एवं नियम (4) के उल्लंघन में दोषी पाया गया। साथ ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम एक्ट 2013 का भी दोषी पाया गया। उसके बाद 4 सितंबर को लघु सिंचाई के HOD मोहम्मद उमर को शासन द्वारा विभाग की तरफ से FIR करने के लिए आदेशित किया गया। 21 सितंबर को अधिशासी अभियंता द्वारा पुरोला थाने में FIR दर्ज कर ली गई।

पुरोला के एसपी पंकज भट्ट का कहना है कि, अभी गुरदेव सिंह और रैना देवी का फोन जप्त करके जांच समिति द्वारा फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। उनसे उनकी व्हाट्सएप चेटिंग से पूरा मामला साफ हो जाएगा और उनकी गिरफ्तारी फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आने के बाद तय होगी।

इस पूरे प्रकरण में कुछ सवाल भी खड़े हुवे है कि, आखिर जब शासन द्वारा 4 सितंबर को FIR करने के लिए विभाग को आदेशित किया तो FIR में विभाग द्वारा इतनी लेट लतीफी क्यों कि गई? क्या विभाग के द्वारा गुरदेव को बचाने का प्रयास किया जा रहा है? 4 जून 2019 को जब जिलाधिकारी द्वारा जांच करने के निर्देश दिए जा चुके थे तो उसके बाद अभी तक फोरेंसिक रिपोर्ट क्यों नहीं आयी?

 

 

महिला अनुसूचित जाति से आती है तो जांच के दौरान इसमे SC/ST एक्ट क्यों नहीं लगाया गया? ऐसे कई सवाल है, जो इस पूरे प्रकरण में सामने आए और पूरा प्रकरण की जांच भी शक के दायरे में आती है।

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