परिचय पत्र के बिना ड्यूटी पर पहुंच रहे रोडवेज परिचालक, टनकपुर डिपो की व्यवस्था पर सवाल
टनकपुर। यात्रियों की सुरक्षा, टिकट वितरण और निगम के राजस्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले उत्तराखण्ड परिवहन निगम के परिचालकों के बिना परिचय पत्र ड्यूटी करने का मामला सामने आया है।
टनकपुर डिपो की एक बस में तैनात परिचालक के पास जब उसकी आधिकारिक पहचान से संबंधित परिचय पत्र मांगा गया तो उसने बताया कि वर्ष 2026 में विभाग या संबंधित एजेंसी की ओर से उन्हें कोई आईडी कार्ड जारी ही नहीं किया गया है।
मामले के सामने आने के बाद उत्तराखण्ड परिवहन निगम की प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों की आधिकारिक पहचान और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सामान्यतः किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्थान में कार्यरत कर्मचारी को उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए विभाग की ओर से परिचय पत्र जारी किया जाता है।
यह कार्ड संबंधित व्यक्ति के उस संस्थान में अधिकृत रूप से कार्यरत होने का आधिकारिक प्रमाण भी होता है।
उत्तराखण्ड परिवहन निगम के परिचालक प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों के बीच यात्रा करते हैं।
टिकट वितरण, यात्रियों से किराया प्राप्त करना, राजस्व का हिसाब-किताब और यात्रा के दौरान यात्रियों की सहायता जैसी अहम जिम्मेदारियां उनके कंधों पर होती हैं। ऐसे में ड्यूटी के दौरान परिचालक की स्पष्ट और आधिकारिक पहचान होना यात्रियों के भरोसे के साथ ही सुरक्षा और जवाबदेही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
सूत्रों के अनुसार, कई परिचालक बिना परिचय पत्र के ही बसों में ड्यूटी पर रवाना हो रहे हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि यात्रियों या जांच करने वाले अधिकारियों के सामने संबंधित कर्मचारी अपनी आधिकारिक पहचान किस आधार पर प्रमाणित करेंगे।
सार्वजनिक परिवहन जैसी महत्वपूर्ण सेवा में अधिकृत कर्मचारी की पहचान को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होना आवश्यक माना जाता है।
परिचय पत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि कर्मचारी की विभागीय पहचान और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से यात्रियों को भी यह भरोसा होता है कि उनके साथ ड्यूटी कर रहा व्यक्ति निगम अथवा अधिकृत एजेंसी का वास्तविक कर्मचारी है।
अब टनकपुर डिपो की बस में परिचालक द्वारा वर्ष 2026 में परिचय पत्र जारी नहीं किए जाने की बात कहे जाने के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है।
ऐसे में उत्तराखण्ड परिवहन निगम को सभी नियमित, संविदा और एजेंसी के माध्यम से तैनात कर्मचारियों के परिचय पत्रों की स्थिति स्पष्ट करने के साथ ड्यूटी के दौरान आईडी कार्ड धारण करने की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
सवाल यह भी है कि यदि परिचालकों को वास्तव में वर्ष 2026 में परिचय पत्र जारी नहीं किए गए हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और बिना आधिकारिक पहचान पत्र के कर्मचारियों को यात्रियों से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों के लिए ड्यूटी पर कैसे भेजा जा रहा है। मामले में निगम प्रबंधन की ओर से स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।


