बिग ब्रेकिंग: ACR विवाद में CAT ने तलब की प्रमुख सचिव वन की टूर डायरी, 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई

ACR विवाद में CAT ने तलब की प्रमुख सचिव वन की टूर डायरी, 26 अक्टूबर को अगली सुनवाई

देहरादून। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की एसीआर में ग्रेडिंग कम किए जाने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड वन विभाग से संबंधित कई गंभीर आरोपों पर सरकार से जवाब तलब किया है।

कैट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव वन को नोटिस जारी कर याचिका में उठाए गए मामलों से संबंधित कार्रवाई के दस्तावेज उपलब्ध कराने के साथ ही प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की वित्तीय वर्ष 2024-25 की टूर डायरी भी पेश करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई 19 अगस्त को कैट की संजीव कुमार और राजवीर सिंह वर्मा की खंडपीठ ने की। न्यायाधिकरण ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है।

ACR में ग्रेडिंग घटाने के खिलाफ CAT पहुंचे थे संजीव
आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने जून 2026 में कैट में याचिका दाखिल कर वित्तीय वर्ष 2024-25 की अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में ग्रेडिंग कम किए जाने को चुनौती दी थी।

याचिका में उन्होंने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु पर व्यक्तिगत दुर्भावना के आधार पर ग्रेडिंग कम करने का आरोप लगाया था। मामले में कैट ने 17 जून को आरके सुधांशु को नामजद नोटिस जारी किया था, जबकि राज्य के मुख्य सचिव और प्रमुख वन संरक्षक को भी नोटिस भेजे गए थे।

याचिका में संजीव चतुर्वेदी का दावा है कि उनकी एसीआर में कम ग्रेडिंग देने से पहले उनके कार्यों का पर्याप्त भौतिक निरीक्षण नहीं किया गया और न ही उनसे संबंधित कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक की गई।

मसूरी के ईको हट से सीमा स्तंभों तक उठाए सवाल

संजीव चतुर्वेदी ने अपनी याचिका में एसीआर विवाद के पीछे उत्तराखंड वन विभाग से जुड़े कई मामलों को उठाया है। इनमें मसूरी में ईको हट निर्माण, बड़ी संख्या में सीमा स्तंभों के कथित रूप से गायब होने, देहरादून और मसूरी वन प्रभागों में बाहरी नर्सरियों से ऊंची दरों पर पौध खरीद और मियावाकी पौधरोपण के प्रस्तावों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

याचिका के अनुसार, मसूरी में वर्ष 2019 के दौरान करीब 1.7 करोड़ रुपये के ईको हट निर्माण कार्य में बिना टेंडर प्रक्रिया के कथित तौर पर फर्जी फर्मों से काम कराए जाने के आरोप सामने आए थे।

संजीव चतुर्वेदी ने इस संबंध में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक को विस्तृत जांच रिपोर्ट भेजी थी। उनके अनुसार, जनवरी 2025 में यह मामला आपराधिक कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2025 में शासन की ओर से पिथौरागढ़ के तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी विनय भार्गव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से भी कथित तौर पर वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत आपराधिक अभियोजन के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा गया था।

12 हजार में सात हजार सीमा स्तंभ गायब होने का दावा

मसूरी वन प्रभाग में कार्ययोजना निर्धारण के दौरान हुई गणना का हवाला देते हुए संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि करीब 12 हजार सीमा स्तंभों में से सात हजार से अधिक गायब पाए गए। उन्होंने इस मामले की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग की थी।

याचिका में मसूरी के तत्कालीन डीएफओ की ओर से वर्ष 2021 से 2024 के बीच खरीदी गई कथित करोड़ों रुपये की संपत्तियों की जांच कराने की अनुशंसा किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

संजीव चतुर्वेदी ने याचिका में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के चर्चित ललिता कुमारी मामले का हवाला देते हुए कहा है कि संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। याचिका में इन कथित मामलों में लंबे समय तक कार्रवाई लंबित रहने पर सवाल उठाए गए हैं।

प्रमुख सचिव की पूरी टूर डायरी मांगी

एसीआर विवाद में संजीव चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु की वित्तीय वर्ष 2024-25 की पूरी टूर डायरी कैट के समक्ष तलब करने की मांग की है। उनका दावा है कि इस अवधि के दौरान प्रमुख सचिव ने न तो उनके किसी कार्य का भौतिक निरीक्षण किया और न ही उनके साथ कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक की।

इसी आधार पर याचिका में कहा गया है कि उनके कार्यों के प्रत्यक्ष मूल्यांकन या भौतिक निरीक्षण के अभाव में दी गई कम ग्रेडिंग का कोई पर्याप्त आधार नहीं था। उन्होंने एसीआर में दी गई उक्त ग्रेडिंग को रद्द किए जाने की मांग की है।

लंबित मामलों की पूरी पत्रावली भी तलब करने की मांग
नोटिस जारी होने के बाद संजीव चतुर्वेदी की ओर से कैट के समक्ष एक अन्य प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया, जिसमें प्रमुख सचिव वन और प्रमुख वन संरक्षक के कार्यालयों में इन मामलों से संबंधित लंबित पत्रावलियां तलब करने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान कैट ने उत्तराखंड सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी। तब सरकार और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद एसीआर विवाद तथा याचिका में उठाए गए वन विभाग से जुड़े कथित मामलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

महत्वपूर्ण: समाचार में उल्लिखित ईको हट निर्माण, सीमा स्तंभों, पौध खरीद, मियावाकी पौधरोपण और अन्य मामलों से जुड़े आरोप याचिकाकर्ता आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की ओर से न्यायाधिकरण के समक्ष लगाए गए हैं।

उपलब्ध जानकारी में संबंधित अधिकारियों अथवा उत्तराखंड सरकार का इन आरोपों पर विस्तृत पक्ष दर्ज नहीं है। संबंधित पक्ष का पक्ष या आधिकारिक जवाब सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।