हाईकोर्ट ने मुख्य अभियंता को माना अवमानना का दोषी, सेवा अभिलेख में दर्ज होगा आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने के मामले में मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को अवमानना का दोषी माना है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले में आदेश की प्रति उत्तराखंड के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि इसे मुख्य अभियंता के सेवा अभिलेख (Service Record) में दर्ज किया जा सके।
मामला प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत जारी एक टेंडर से जुड़ा है। टेंडर प्रक्रिया में मैसर्स जियारा पार्टनरशिप फर्म ने भी भाग लिया था। हालांकि, फर्म की टेक्निकल बिड को विभाग की ओर से अस्वीकार कर दिया गया। इसके खिलाफ फर्म ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने लगाई थी टेंडर पर रोक
याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शुरुआती चरण में टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता फर्म को सही माना और उसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए।
आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद विभाग ने टेंडर नहीं खोला। इसके बाद याचिकाकर्ता ने आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। मामले में मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को पक्षकार बनाया गया और न्यायालय ने उन्हें नोटिस जारी किया।
सबसे कम बोली के बावजूद टेंडर नहीं देने का आरोप
अवमानना याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय को बताया गया कि उनकी बोली सबसे कम थी, इसके बावजूद विभाग उन्हें टेंडर देने के बजाय किसी अन्य को टेंडर देने की कोशिश कर रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने मुख्य अभियंता के खिलाफ आरोप तय किए और उन्हें 10 दिन के भीतर खंडपीठ के आदेश का अनुपालन करने का समय दिया।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि आदेश का पालन नहीं होने पर अगली सुनवाई में उनके खिलाफ सजा सुनाई जा सकती है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित रहना होगा।
कोर्ट ने माना जानबूझकर किया आदेश का उल्लंघन
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामले को विस्तार से सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा गया था। 15 जुलाई को पारित आदेश में न्यायालय ने मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक को जानबूझकर न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करने का दोषी माना।
हालांकि, बाद में न्यायालय के समक्ष आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका का निस्तारण करते हुए जारी नोटिस को निरस्त कर दिया।
इसके साथ ही न्यायालय ने आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि मुख्य अभियंता संजय कुमार पाठक के सेवा अभिलेख में न्यायालय के आदेश को दर्ज किया जा सके।


