खुलासा: सरस मार्केट बना अव्यवस्था और बकायेदारों का अड्डा, करोड़ों का किराया अटका

सरस मार्केट बना अव्यवस्था और बकायेदारों का अड्डा, करोड़ों का किराया अटका

  • KMVN की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, ऑडिट के नाम पर सूचना रोकने के आरोप

हल्द्वानी। शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में शामिल सरस मार्केट एक बार फिर विवादों में आ गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने कुमाऊँ मण्डल विकास निगम (KMVN) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया द्वारा दायर RTI के जवाब में किराया वसूली, रखरखाव, रिकॉर्ड प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।

आरोप है कि करोड़ों रुपये का किराया बकाया होने के बावजूद निगम की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि बाजार की स्थिति लगातार बदहाल होती जा रही है।

RTI के जवाब में निगम की ओर से कहा गया कि “शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का ऑडिट गतिमान है, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।” इस जवाब के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऑडिट का हवाला देकर सूचना रोकी जा सकती है और क्या यह सूचना के अधिकार कानून की भावना के विपरीत नहीं है।

पारदर्शिता की मांग करने वालों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट चल रहा है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि नागरिकों को सूचना देने से इनकार कर दिया जाए।

RTI में सरस मार्केट की भूमि से जुड़ी स्थिति भी अस्पष्ट बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मार्केट का कुल रकबा 6579 वर्ग मीटर है, लेकिन भूमि की खतौनी तक स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं बताई गई।

जानकारी में यह भी सामने आया कि जमीन आयुक्त स्तर से लीज पर दी गई थी, लेकिन उससे संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड अधूरा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति का संचालन बिना पूर्ण रिकॉर्ड के आखिर कैसे किया जा रहा है।

किराया वसूली को लेकर भी RTI में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार कई दुकानदारों ने लंबे समय से किराया जमा नहीं किया है। कुछ मामलों को न्यायालय में लंबित बताया गया है, जबकि अधिकांश मामलों में निगम की ओर से केवल नोटिस जारी करने और “RC काटी गई” लिखकर कार्रवाई पूरी मान ली गई।

इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर वर्षों से केवल नोटिस और राजस्व वसूली प्रमाणपत्र जारी करने तक ही कार्रवाई क्यों सीमित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आम नागरिक किसी सरकारी भुगतान में चूक करता है तो तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन यहां करोड़ों के बकायेदारों पर नरमी बरती जा रही है।

RTI में दुकानों से संबंधित वित्तीय विवरण भी सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार 12 लाख रुपये प्रीमियम वाली 24 दुकानें, 10 लाख प्रीमियम वाली 32 दुकानें, 9 लाख की 10 दुकानें और 7 लाख प्रीमियम वाली 8 दुकानें बाजार में मौजूद हैं।

इतने बड़े निवेश और राजस्व के बावजूद रखरखाव पर बेहद कम खर्च किए जाने का आरोप है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 12 लाख श्रेणी की दुकानों पर मात्र 8327 रुपये, 10 लाख श्रेणी पर 5978 रुपये और 9 लाख श्रेणी पर 7714 रुपये खर्च दर्शाया गया है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद बाजार की सफाई और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि सरस मार्केट की हालत लगातार खराब होती जा रही है। बाजार परिसर में जगह-जगह गंदगी और कूड़े का अंबार दिखाई देता है।

सफाई व्यवस्था लगभग चरमरा चुकी है, जबकि रखरखाव के दावे केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं। लोगों का आरोप है कि निगम की ओर से नियमित निगरानी नहीं की जा रही, जिसके कारण बाजार की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय सरस मार्केट शराबियों का अड्डा बन जाता है। बाजार में पर्याप्त सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

शहर के मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यहां नियंत्रण और अनुशासन का अभाव दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि कमिश्नर कार्यालय सरस मार्केट के बेहद करीब स्थित है और अधिकारी नियमित रूप से इसी मार्ग से गुजरते हैं, इसके बावजूद बाजार की बदहाल स्थिति पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

इससे निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे।

कानूनी दृष्टि से भी यह मामला गंभीर माना जा रहा है। राजस्व वसूली (RC) जारी होने के बाद भी यदि वसूली नहीं हो रही, तो यह प्रशासनिक निष्क्रियता को दर्शाता है। सरकारी संपत्ति पर नियम उल्लंघन और संभावित अवैध कब्जों के बावजूद कार्रवाई न होना भी सवालों के घेरे में है।

जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी राजस्व हानि और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका भी दिखाई देती है।
समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया ने पूरे मामले में निगम की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

उनका कहना है कि वर्षों से केवल नोटिस और RC जारी करने का खेल चल रहा है, जबकि करोड़ों रुपये का सरकारी राजस्व फंसा हुआ है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बकायेदारों से वसूली नहीं हो रही तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा और आखिर जनता के धन की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा। RTI से सामने आए इन खुलासों के बाद अब निगाहें प्रशासन और निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

स्थानीय लोगों की मांग है कि बकायेदारों से तत्काल सख्त वसूली की जाए, दुकानों और लीज रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हो, अवैध कब्जों पर कार्रवाई की जाए और बाजार में सफाई व सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए। साथ ही, पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठ रही है।

अब बड़ा सवाल यही है कि RTI के इस खुलासे के बाद प्रशासन वास्तव में कोई सख्त कदम उठाएगा या फिर हर बार की तरह “RC काटी गई” लिखकर फाइलों को आगे बढ़ा दिया जाएगा।