एक्शन: निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती। 12 और स्कूलों को नोटिस, अब तक 50 संस्थान रडार पर

निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती। 12 और स्कूलों को नोटिस, अब तक 50 संस्थान रडार पर

हल्द्वानी। नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी Lalit Mohan Rayal के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी Govind Ram Jaiswal ने हल्द्वानी और आसपास के 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही पूरे जनपद में नोटिस पाने वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है।

प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कई निजी विद्यालय बच्चों पर एनसीईआरटी की किताबों के बजाय महंगी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें थोप रहे थे। इतना ही नहीं, कुछ स्कूल अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे थे।

प्रशासन ने इसे सीधे तौर पर अभिभावकों के आर्थिक शोषण से जोड़ते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
जिन 12 विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें वेदान्तंम इंटरनेशनल स्कूल (दमुवाढूंगा), चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल (बरेली रोड), न्यू बाल संसार स्कूल (तीनपानी), आरुष पब्लिक स्कूल (हाथीखाल), जी किड्स पब्लिक स्कूल (मल्ली बमौरी), काठगोदाम पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, लिटिल स्पार्कल एकेडमी (मोटाहल्दू), मानस पब्लिक स्कूल (मानपुर वेस्ट), नेशनल पब्लिक स्कूल (कुसुमखेड़ा), श्री कृपा पब्लिक स्कूल, सेंट जॉर्ज स्कूल (आरटीओ रोड) और समिट पब्लिक स्कूल (डहरिया) शामिल हैं।

प्रशासन ने इन सभी स्कूलों को 15 दिन के भीतर कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन करने को कहा है। इसमें संशोधित पुस्तक सूची जारी करना, एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता देना, निर्धारित दुकानों की बाध्यता समाप्त करना, स्कूल की वेबसाइट पर फीस और पुस्तक सूची सार्वजनिक करना, अतिरिक्त वसूली का समायोजन करना और अनावश्यक किताबों के बोझ से अभिभावकों को राहत देना शामिल है।

इसके साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर विकासखंड स्तर पर संयुक्त जांच समितियों का गठन कर दिया गया है, जो 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। इन समितियों को सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल इन आदेशों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ मान्यता निलंबन, मान्यता निरस्तीकरण और अन्य कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन की इस सख्ती को अभिभावकों के हित में एक अहम कदम माना जा रहा है। लंबे समय से निजी स्कूलों की फीस, किताबों और अन्य मदों में मनमानी को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

ऐसे में यह कार्रवाई शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।