उत्तराखंड में वन्यजीवों का कहर। नैनीताल में बाघ ने ली जान, चमोली में तेंदुए का हमला
रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
नैनीताल जनपद में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और भयावह घटना सामने आई है। फतेहपुर रेंज के भदूनी गांव में खेत में काम कर रहे 30 वर्षीय कमल सिंह पर कथित तौर पर बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों द्वारा तलाश करने पर खेतों के पास युवक का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शव की स्थिति बेहद गंभीर थी, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बन गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है।
दो दिन पहले भी महिला की गई थी जान
लगातार हो रही घटनाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है। भीमताल ब्लॉक के ज्योली गांव में दो दिन पहले 47 वर्षीय महिला को भी बाघ ने उस समय अपना शिकार बना लिया था, जब वह जंगल में घास लेने गई थी। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में दहशत इस कदर है कि लोग दिन में भी खेतों और जंगल की ओर जाने से डर रहे हैं।
वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बाघ की सक्रियता की जानकारी पहले से होने के बावजूद वन विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए।
इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता नीरज तिवारी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विभाग की लापरवाही के कारण लगातार जानें जा रही हैं।
उन्होंने आदमखोर वन्यजीव को पकड़ने, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। वन विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और निगरानी तेज करने की बात कही है।
चमोली में तेंदुए का हमला, युवक घायल
चमोली जनपद के पोखरी विकासखंड स्थित रौता गांव में तेंदुए के हमले में एक युवक घायल हो गया। मोहित सिंह पर खेतों में काम करते समय अचानक तेंदुए ने हमला कर दिया।
हमले में उसके हाथ और पीठ पर गहरे जख्म आए हैं। हालांकि युवक ने साहस दिखाते हुए तेंदुए का सामना किया और अपनी जान बचाने में सफल रहा। घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
ग्रामीणों में दहशत, पिंजरा लगाने की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पहले भी तेंदुए की सक्रियता की सूचना दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग की है।
वन क्षेत्राधिकारी कपिल गुसाईं और प्रभागीय वन अधिकारी सर्वेश दुबे ने बताया कि, विभाग अलर्ट है और उच्च अधिकारियों से समन्वय किया जा रहा है। घायल को तत्काल 15 हजार रुपये की सहायता भी दी गई है।
बढ़ता संघर्ष बना बड़ी चुनौती
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक ओर जानलेवा हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, या ऐसे हादसे यूं ही जारी रहेंगे।

