पेपर लीक के साए से बाहर, अब 17 मई को होगी स्नातक परीक्षा
देहरादून। उत्तराखंड में लंबे समय से इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा की नई तारीखों का ऐलान कर दिया गया है।
पहले पेपर लीक के कारण रद्द हुई इस परीक्षा को अब दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया गया है, जिससे युवाओं को एक बार फिर अपनी योग्यता साबित करने का मौका मिलेगा।
दरअसल, 21 सितंबर 2025 को आयोजित हुई इस परीक्षा को उस समय रद्द करना पड़ा था, जब परीक्षा के दौरान ही प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे।
इस घटना ने न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए, बल्कि प्रदेशभर में अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे। बढ़ते दबाव के बीच सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा और परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद से ही अभ्यर्थी नई परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे थे। अब आयोग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नई तारीखों की घोषणा कर दी है।
आयोग के अनुसार, तकनीकी पदों के लिए परीक्षा 3 मई को आयोजित की जाएगी, जबकि अन्य पदों के लिए 17 मई की तारीख तय की गई है। इस बार परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए इसे कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जाएगा।
टैब आधारित इस परीक्षा प्रणाली से पेपर लीक और नकल की संभावना को काफी हद तक कम करने की कोशिश की गई है।
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत राज्य के विभिन्न विभागों में कुल 57 पदों को भरा जाना है, जिनके लिए 5,872 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। तकनीशियन और सर्वेयर पदों के लिए सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिससे इन पदों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार परीक्षा केंद्रों पर डिजिटल निगरानी, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी नियंत्रण को पहले से अधिक सख्त किया गया है। साथ ही अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सभी जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।
पेपर लीक जैसी घटनाओं ने पहले ही भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में आयोग के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराना है। यही वजह है कि तकनीक का व्यापक इस्तेमाल करते हुए हर स्तर पर सख्ती बरती जा रही है।
वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द होने से उन्हें मानसिक और समय का नुकसान जरूर हुआ, लेकिन अब नई तारीख मिलने से उम्मीद जगी है। छात्र चाहते हैं कि इस बार परीक्षा बिना किसी विवाद के संपन्न हो, ताकि उनके भविष्य पर किसी तरह का सवाल न उठे।
कुल मिलाकर, नई तारीखों की घोषणा ने जहां युवाओं को राहत दी है, वहीं आयोग के लिए यह भरोसा बहाल करने की बड़ी परीक्षा भी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार परीक्षा कितनी पारदर्शी और विवाद-मुक्त रहती है।



