उत्तराखंड में CAA के तहत 153 शरणार्थियों को मिली नागरिकता। 40–50 आवेदनों की जांच अभी भी जारी
देहरादून। देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (CAA) लागू होने के बाद विदेश से आए सैकड़ों हिंदू, सिख एवं अन्य गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है। उत्तराखंड में भी इस कानून के लागू होने के बाद अब तक कुल 153 शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जा चुकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभी भी देहरादून में रह रहे करीब 40–50 शरणार्थियों के आवेदन जांच प्रक्रिया में हैं। संबंधित एजेंसियां आवश्यक दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही हैं।
तमाम जांच प्रक्रिया के बाद दी जाती है नागरिकता
शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया राज्य और केंद्र सरकार के समन्वय से पूरी की जाती है। जब कोई शरणार्थी नागरिकता के लिए आवेदन करता है, तो उसके दस्तावेजों, भारत में निवास अवधि और मूल देश में धार्मिक उत्पीड़न से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जाती है।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, स्थानीय प्रशासन की पुष्टि और केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति के बाद ही नागरिकता प्रदान की जाती है।
153 में 147 पाकिस्तान से, 6 अफगानिस्तान से
राज्य में जिन 153 लोगों को नागरिकता दी गई है, उनमें से:
- 147 लोग पाकिस्तान से
- 6 लोग अफगानिस्तान से
पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए ये शरणार्थी लंबे समय से उत्तराखंड में रह रहे थे। इनमें अधिकांश हिंदू समुदाय से हैं, जबकि कुछ सिख समुदाय के सदस्य भी शामिल हैं।
देहरादून समेत इन जिलों में बसे हैं शरणार्थी
मुख्य रूप से देहरादून जिले में विदेश से आए शरणार्थी बसे हुए हैं। इसके अतिरिक्त कुछ शरणार्थी निम्न जिलों में भी रह रहे हैं।
- हरिद्वार
- ऊधम सिंह नगर
- नैनीताल
- उत्तरकाशी
नागरिकता मिलने के बाद अब ये सभी विधिवत रूप से भारतीय नागरिक कहलाएंगे और उन्हें अन्य नागरिकों के समान अधिकार प्राप्त होंगे।
मुख्यमंत्री का बयान
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार सीएए कानून लेकर आई, जिसके माध्यम से पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके समुदायों को भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “सीएए के तहत पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर चुके हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदाय के लोगों को भारत में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।
उत्तराखंड में भी 153 लोगों को नागरिकता दी गई है। यह कदम न केवल मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को भी चरितार्थ करता है और विश्व भर में रह रहे हिंदुओं को राष्ट्र गौरव से जोड़ता है।”
क्या है CAA?
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (Citizenship Amendment Act 2019) भारत के नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करने वाला कानून है।
इस कानून के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए उन अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता के लिए पात्र माना गया है।
- हिंदू
- सिख
- बौद्ध
- जैन
- पारसी
- ईसाई
समुदाय से संबंधित हैं और 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके हैं।
विधायी प्रक्रिया
- 10 दिसंबर 2019: लोकसभा से पारित
- 11 दिसंबर 2019: राज्यसभा से पारित
- 12 दिसंबर 2019: तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी
- 10 जनवरी 2020: कानून प्रभावी
- 11 मार्च 2024: अधिसूचना जारी, देशभर में लागू
उत्तराखंड में CAA के तहत नागरिकता प्रदान किए जाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। 153 शरणार्थियों को नागरिकता मिलना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और मानवीय कदम माना जा रहा है। वहीं, शेष आवेदनों की जांच पूरी होने के बाद आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है।



