कैंची धाम ट्रस्ट ने झूठी खबरों पर दी सफाई, 50 वर्ष पुराने रिकॉर्ड किए सार्वजनिक
नैनीताल। उत्तराखण्ड के विश्वविख्यात कैंची धाम आश्रम को लेकर सोशल मीडिया, कुछ पोर्टलों और न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित कथित भ्रामक जानकारियों के बीच ट्रस्ट ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है। लगभग पचास वर्ष पुराने ट्रस्ट ने दस्तावेज़ों और कानूनी तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति सार्वजनिक की है।
अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने रखी ट्रस्ट की स्थिति
कैंची धाम ट्रस्ट के अधिवक्ता राजीव बिष्ट मीडिया के सामने आए और उन्होंने बताया कि वर्ष 1974 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल द्वारा Charitable Endowment Act, 1890 के अंतर्गत धाम की समस्त संपत्ति ट्रस्ट के नाम की गई थी।
- 6 मार्च 1974 को संपत्ति का गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ।
- नियमानुसार तब से अब तक ट्रस्ट के 13 सदस्य समय-समय पर बदलते रहे हैं।
- ट्रस्ट का सरकार द्वारा प्रतिवर्ष ऑडिट किया जाता है।
- 31 मार्च 2024 तक का ऑडिट पूरा हो चुका है।
- मंदिर का आयकर रिटर्न नियमित रूप से दाखिल किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि वित्तीय अनियमितता के जो आरोप लगाए गए हैं, वे बेबुनियाद और तथ्यों की पुष्टि किए बिना लगाए गए हैं।
चढ़ावे की गिनती पर स्पष्टता
अधिवक्ता के अनुसार, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती के लिए State Bank of India (एसबीआई) की टीम ट्रस्ट के साथ मिलकर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत गिनती करती है और राशि को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाया जाता है।
न्यायालय में लंबित मामला
पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला ने कैंची धाम में कथित वित्तीय अनियमितता और आसपास अतिक्रमण के आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा था।
न्यायालय ने पत्र को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित है।
मीडिया से अपील
अधिवक्ता राजीव बिष्ट ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, न्यूज़ पोर्टल और यू-ट्यूबर बिना आधिकारिक पुष्टि के भ्रामक सामग्री प्रसारित कर रहे हैं, जिससे धाम की छवि प्रभावित हो रही है।
उन्होंने सभी मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि न्यायालय में लंबित प्रकरण पर तथ्यहीन खबरें प्रसारित कर उच्च न्यायालय की अवमानना जैसी स्थिति उत्पन्न न करें।



