वीडियो: अलकनंदा में दो बोटों की जोरदार भिड़ंत। 200 शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, देखें….

अलकनंदा में दो बोटों की जोरदार भिड़ंत। 200 शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, देखें….

पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर क्षेत्र में अलकनंदा नदी में दो बोटों की जोरदार टक्कर का मामला सामने आया है। घटना रविवार, 15 फरवरी की सुबह की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बोट फरासू की ओर से धारी देवी मंदिर क्षेत्र की तरफ आ रही थी। मंदिर के समीप पहुंचते ही दोनों बोटें एक-दूसरे के अत्यधिक करीब आ गईं और अचानक टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक बोट दूसरी के ऊपर चढ़ गई।

देखें वीडियो:-

हादसे के समय दोनों बोटों में केवल चालक ही सवार थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। टक्कर के दौरान एक चालक संतुलन खोकर अलकनंदा नदी में जा गिरा। कुछ क्षणों के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

टक्कर के बाद का घटनाक्रम

  • एक बोट टक्कर के बाद कुछ देर तक नदी के बीच अनियंत्रित होकर गोल-गोल घूमती रही।
  • नदी में गिरे चालक को स्थानीय लोगों और राहत दल ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला।
  • पास में संचालित दूसरी बोट के चालक और कर्मचारियों ने भी तुरंत सहायता की।
  • राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ।

 वीडियो हुआ वायरल

घटना के दौरान किनारे पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने मोबाइल से वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद क्षेत्र में बोट संचालन की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि, नदी में बोट संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए। मंदिर क्षेत्र में भीड़ और धार्मिक गतिविधियों को देखते हुए विशेष सतर्कता आवश्यक है।

200 से अधिक शिकायतें दर्ज

धारी देवी मंदिर समिति के प्रबंधक लक्ष्मी प्रसाद पांडे के अनुसार, बोट संचालन को लेकर शिकायत रजिस्टर में अब तक 200 से अधिक आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि, “पूर्व में उपजिलाधिकारी श्रीनगर को पत्र भेजकर बोट संचालन को मंदिर परिसर से कम से कम 500 मीटर दूर स्थानांतरित करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”

मंदिर समिति का कहना है कि बोट संचालन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, जिसका विरोध नहीं है। लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए इसे मंदिर क्षेत्र से हटाकर गोवा बीच या श्रीनगर की ओर गुफा के पास संचालित किया जाना चाहिए।

  • धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
  • क्या प्रशासन इस घटना के बाद सख्त दिशा-निर्देश जारी करेगा?

यह घटना एक चेतावनी है कि पर्यटन गतिविधियों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोपरि होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।