बिग ब्रेकिंग: ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर प्रश्नचिह्न: डीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली  पर आरोप

जीरो टॉलरेंस’ के दावों पर प्रश्नचिह्न: डीएम कार्यालय की कार्यप्रणाली  पर आरोप

देहरादून। जन अधिकार पार्टी–जनशक्ति की ओर से उत्तराखंड शासन को भेजे गए शिकायत पत्र में देहरादून जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पार्टी ने जिलाधिकारी कार्यालय में नियमों की अनदेखी, संदिग्ध पदस्थापन और सेवानिवृत्त कर्मी से कार्य लिए जाने के मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, देहरादून जिला प्रशासन के अंतर्गत जिलाधिकारी कार्यालय में एक ऐसे कर्मचारी को पेशकार के रूप में कार्य कराया जा रहा है, जिन पर पूर्व में गंभीर आरोप लग चुके हैं।

पत्र में उल्लेख है कि संबंधित व्यक्ति ऋषिकेश तहसील में पेशकार रहते हुए विजिलेंस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं और कुछ समय तक कारावास में भी रहे। इसके बावजूद उन्हें देहरादून जैसे संवेदनशील जनपद में जिलाधिकारी कार्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं।

पार्टी का कहना है कि शासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति के दावों के विपरीत ऐसे मामलों में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई दे रही है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है,

कि संबंधित कर्मी द्वारा वित्तीय प्रकृति के कार्यों में दखल की सूचनाएं मिल रही हैं, जिससे पारदर्शिता और प्रशासनिक अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

दूसरा प्रमुख मुद्दा एक सेवानिवृत्त अधिकारी से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया है कि राजेश कपिल 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं,

और उन्हें सेवा विस्तार की स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई। इसके बावजूद उनसे जिलाधिकारी कार्यालय में कार्य लिए जाने तथा सरकारी संसाधनों एवं सुविधाओं के उपयोग का आरोप लगाया गया है, जिसे नियमों के विपरीत बताया गया है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही, जांच पूर्ण होने तक संबंधित कर्मियों को संवेदनशील दायित्वों से हटाने,

वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।

प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।