बिग ब्रेकिंग: परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले जोड़ों की सुरक्षा राज्य की ज़िम्मेदारी: हाईकोर्ट
प्रयागराज: Allahabad High Court ने हाल ही में स्पष्ट किया कि परिवार की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ शादी करने वाले बालिग जोड़ों की जान और व्यक्तिगत आज़ादी की रक्षा करना राज्य की ज़िम्मेदारी है।
जस्टिस गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के 31 अगस्त 2019 के शासनादेश (GO) का सख्ती से पालन करने का निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
क्या है मामला,
एक बालिग जोड़े ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि महिला के पिता उम्र के अंतर और पति की कथित पूर्व वैवाहिक स्थिति को लेकर उन्हें लगातार धमका रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने राज्य से अपनी जान और स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
हालांकि, अदालत ने कहा कि नवंबर में दी गई अंतरिम सुरक्षा के बाद फिलहाल महिला के पिता से कोई तत्काल खतरा नहीं दिखता। वहीं, राज्य के स्टैंडिंग काउंसिल ने स्पष्ट किया कि पति की यह पहली शादी है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
यदि भविष्य में याचिकाकर्ताओं को वास्तविक और गंभीर खतरा महसूस होता है, तो वे संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों की ज़िम्मेदारी होगी कि वे हर मामले में खतरे का आकलन करें और स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षित आवास और सुरक्षा उपलब्ध कराएं।
2019 के शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।
कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Shakti Vahini v. Union of India का हवाला दिया, जिसमें ऑनर किलिंग और खाप पंचायतों से जुड़े मामलों में राज्यों को प्रभावी तंत्र बनाने के निर्देश दिए गए थे।
2019 का शासनादेश क्या कहता है,
उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 अगस्त 2019 को एक GO जारी कर ऐसे जोड़ों की सुरक्षा के लिए रोकथाम, सुधार और दंडात्मक उपाय तय किए थे। इसमें कहा गया है कि:
- खाप पंचायतों या ‘इज़्ज़त’ के नाम पर दी जाने वाली धमकियों को गंभीर मामला माना जाएगा।
- अन्य पारिवारिक विरोध के मामलों में भी अधिकारियों को जोखिम का आकलन कर उचित राहत देनी होगी।
- निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बढ़ते सुरक्षा याचिका मामलों पर कोर्ट की चिंता
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि बड़ी संख्या में युवा जोड़े सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं। ऐसे में जिला स्तर पर प्रभावी व्यवस्था और स्पष्ट गाइडलाइन बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अदालत ने दोहराया कि 2019 के शासनादेश में दिए गए निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों के लिए बाध्यकारी हैं और उनका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।



