एक्सक्लूसिव खुलासा: उत्तराखंड के सांसदों ने खर्च की केवल 18% सांसद निधि, 232 प्रस्तावित कार्य लंबि
देहरादून: उत्तराखंड के लोकसभा और राज्यसभा के वर्तमान सांसदों को आवंटित सांसद निधि में से दिसंबर 2025 तक मात्र 18 प्रतिशत धनराशि ही खर्च हो पाई है। इस खर्च में पूर्ण हो चुके और गतिमान कार्यों पर की गई राशि शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है।
कि सांसदों द्वारा प्रस्तावित 232 कार्यों को अधिकारियों ने स्वीकृति ही नहीं दी, जबकि स्वीकृत कार्यों में से 87 कार्य दिसंबर 2025 तक शुरू भी नहीं हो सके। यह खुलासा सांसद निधि के नोडल विभाग, ग्राम्य विकास आयुक्त उत्तराखंड कार्यालय द्वारा आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट नदीम उद्दीन को उपलब्ध कराई गई सूचना से हुआ है।
आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार दिसंबर 2025 तक उत्तराखंड के 5 लोकसभा और 3 राज्यसभा सांसदों, यानी कुल 8 सांसदों को 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि आवंटित हुई।
इसमें 49 करोड़ रुपये 5 लोकसभा सांसदों को वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए तथा 46.90 करोड़ रुपये 3 राज्यसभा सांसदों को उनके कार्यकाल प्रारंभ होने से दिसंबर 2025 तक आवंटित किए गए।
वर्तमान कार्यकाल में पूर्ण कार्यों पर कुल 7.08 करोड़ रुपये और अधूरे या गतिमान कार्यों पर 10.65 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो कुल आवंटित धनराशि का लगभग 18 प्रतिशत है।
लोकसभा के 5 सांसदों द्वारा पूर्ण कार्यों पर 2.089 करोड़ रुपये तथा गतिमान कार्यों पर 1.191 करोड़ रुपये खर्च दर्शाए गए हैं, जो कुल आवंटित राशि का मात्र 7 प्रतिशत है।
इसके विपरीत राज्यसभा के 3 सांसदों ने पूर्ण कार्यों पर 4.99 करोड़ रुपये और चल रहे कार्यों पर 9.46 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो उनकी कुल आवंटित निधि का 31 प्रतिशत है।
लोकसभा सांसदों में नैनीताल-उधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्ट सांसद निधि खर्च के मामले में 18 प्रतिशत के साथ सबसे आगे हैं। उनके बाद टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज लक्ष्मी शाह 14 प्रतिशत खर्च के साथ दूसरे स्थान पर हैं। अन्य लोकसभा सांसदों में गढ़वाल से अनिल बलूनी का खर्च शून्य के बराबर,
अल्मोड़ा से अजय टम्टा और हरिद्वार से त्रिवेंद्र सिंह रावत का खर्च दिसंबर 2025 तक एक प्रतिशत से भी कम दर्ज किया गया है।
राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल 47 प्रतिशत खर्च के साथ शीर्ष पर हैं। उनके बाद कल्पना सैनी 27 प्रतिशत और महेंद्र भट्ट 6 प्रतिशत खर्च के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
कार्यवार विवरण के अनुसार अजय भट्ट ने दिसंबर 2025 तक कुल 316 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 229 स्वीकृत हुए। इनमें 54 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 154 पर कार्य चल रहा है और 21 कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए हैं।
माला राज लक्ष्मी शाह ने 128 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 89 स्वीकृत हुए। इनमें 11 कार्य पूर्ण, 64 गतिमान और 14 कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने अपने वर्तमान कार्यकाल में केवल 4 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 2 स्वीकृत हुए। एक कार्य पूर्ण और एक गतिमान है, जबकि कोई भी कार्य लंबित नहीं है। अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा के 4 स्वीकृत कार्यों में से 2 शुरू नहीं हो पाए हैं और 2 गतिमान हैं।
इस पर कुल निधि का मात्र 0.041 करोड़ रुपये, यानी एक प्रतिशत से भी कम खर्च हुआ है। हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के 16 प्रस्तावित कार्यों में से 10 स्वीकृत हुए, जिनमें 1 कार्य पूर्ण, 5 गतिमान और 4 कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। इस पर कुल 0.080 करोड़ रुपये, यानी एक प्रतिशत से कम राशि खर्च हुई है।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने 191 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 144 स्वीकृत हुए। इनमें 23 कार्य पूर्ण, 92 गतिमान और 29 कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
कल्पना सैनी ने 121 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 89 स्वीकृत हुए। इनमें 26 कार्य पूर्ण, 60 गतिमान और 3 कार्य प्रारंभ नहीं हो पाए हैं। महेंद्र भट्ट ने दिसंबर 2025 तक 44 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें से 23 स्वीकृत हुए। इनमें 2 कार्य पूर्ण, 7 गतिमान और 14 कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
कुल मिलाकर आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सांसद निधि की बड़ी राशि अभी भी उपयोग से बाहर है और अनेक स्वीकृत कार्य धरातल पर शुरू ही नहीं हो पाए हैं, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।



