बिग ब्रेकिंग: गंगा में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, मामला फिर नामित पीठ को भेजा

बिग ब्रेकिंग: गंगा में अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, मामला फिर नामित पीठ को भेजा

  • 48 स्टोन क्रेशरों को बंद करने के आदेश पर पहले जता चुका है कोर्ट नाराजगी

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में रायवाला से भोगपुर और कुम्भ मेला क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे कथित अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह याचिका मातृ सदन, हरिद्वार की ओर से दायर की गई है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में आज यह मामला सूचीबद्ध हुआ। सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि इस मामले की पूर्व में सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की नामित पीठ कर रही है,

इसलिए इसे पुनः उसी पीठ को सुनवाई के लिए भेजा जाता है। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

पूर्व आदेशों पर जताई थी कड़ी नाराजगी

इससे पहले न्यायमूर्ति मैठाणी की पीठ ने अदालत के आदेशों का अनुपालन न होने पर कड़ी टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि पूर्व आदेशों के बावजूद स्टोन क्रेशरों का संचालन कानून का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने हरिद्वार में संचालित 48 स्टोन क्रेशरों को तत्काल बंद करने तथा उनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के निर्देश जिला अधिकारी और एसएसपी हरिद्वार को दिए थे। साथ ही एक सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) कोर्ट में दाखिल करने को कहा गया था।

याचिका में क्या है आरोप?

मातृ सदन की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे गंगा नदी के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि गंगा नदी को स्वच्छ और संरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) का गठन किया है, लेकिन कुम्भ क्षेत्र तक में खनन जारी रहने से मिशन के उद्देश्य प्रभावित हो रहे हैं।

अगली सुनवाई पर नजर

मामले को नामित पीठ के पास भेज दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन और प्रशासन की कार्रवाई पर अगली तारीख में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।