बिग ब्रेकिंग: ट्रेन की ढाई घंटे देरी से छात्रा की प्रवेश परीक्षा छूटी, रेलवे पर 9 लाख का मुआवज़ा

ट्रेन की ढाई घंटे देरी से छात्रा की प्रवेश परीक्षा छूटी, रेलवे पर 9 लाख का मुआवज़ा

बस्ती। बस्ती जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक अहम फैसले में Indian Railways को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए एक छात्रा को ₹9 लाख मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। यह मामला ट्रेन की अत्यधिक देरी के कारण छात्रा की प्रवेश परीक्षा छूटने से जुड़ा है। आयोग की पीठ में अध्यक्ष अमर जीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह शामिल थे।

मामला क्या था?

शिकायत छात्रा के पिता एवं प्राकृतिक अभिभावक द्वारा दायर की गई थी। शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी को 7 मई 2018 को लखनऊ स्थित जय नारायण पीजी कॉलेज में आयोजित प्रवेश परीक्षा में शामिल होना था। परीक्षा की रिपोर्टिंग टाइम दोपहर 12:30 बजे और परीक्षा का समय 1:30 बजे से 3:00 बजे तक निर्धारित था।

छात्रा बस्ती से लखनऊ जाने के लिए इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन संख्या 12531 से रवाना हुई थी, जिसका निर्धारित आगमन समय सुबह 11:00 बजे था।

लेकिन ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से दोपहर लगभग 1:34 बजे लखनऊ पहुँची। इस देरी के कारण छात्रा समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुँच सकी और उसे परीक्षा हॉल में प्रवेश से वंचित कर दिया गया।

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उनकी बेटी एक मेधावी छात्रा है और इस परीक्षा के छूटने से उसके शैक्षणिक भविष्य को गंभीर नुकसान पहुँचा है। यह भी आरोप लगाया गया कि रेलवे की ओर से न तो देरी की कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।

रेलवे की दलील

रेलवे ने सेवा में कमी से इनकार करते हुए कहा कि ट्रेनें परिचालन कारणों, तकनीकी समस्याओं या अन्य अनियंत्रित परिस्थितियों के चलते देर से चल सकती हैं। रेलवे का यह भी तर्क था कि वे किसी यात्री के व्यक्तिगत उद्देश्य जैसे परीक्षा या साक्षात्कार के लिए समय पर पहुँचने की गारंटी नहीं देते, इसलिए मुआवज़े का दावा उचित नहीं है।

आयोग का अवलोकन

आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता है और रेलवे सेवा प्रदाता। आयोग ने यह तथ्य निर्विवाद माना कि ट्रेन लगभग ढाई घंटे की देरी से पहुँची, जिसके चलते छात्रा एक महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा से वंचित हो गई।

आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस और अपरिहार्य कारण के इस प्रकार की असामान्य देरी सेवा में कमी की श्रेणी में आती है। परीक्षा छूटने से छात्रा को न केवल शैक्षणिक नुकसान हुआ बल्कि गंभीर मानसिक पीड़ा भी पहुँची।

आदेश

आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए Indian Railways को निर्देश दिया कि वह छात्रा को:

  • ₹9,00,000 — मानसिक कष्ट और शैक्षणिक नुकसान के लिए
  • ₹5,000 — वाद व्यय के रूप में भुगतान करे।

आदेश के अनुपालन के लिए 45 दिन की समय-सीमा तय की गई है। निर्धारित अवधि में भुगतान न होने की स्थिति में मुआवज़े की राशि पर 12% वार्षिक ब्याज देय होगा।