बिग ब्रेकिंग: आवारा कुत्तों से जन-सुरक्षा पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकारा

आवारा कुत्तों से जन-सुरक्षा पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को फटकारा

नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गोवा और केरल के समुद्र तटों पर पर्यटकों पर कुत्तों के हमलों की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस समस्या का सीधा असर पर्यटन पर पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि समुद्र तटों पर मछलियों के अवशेष पड़े होने के कारण आवारा कुत्ते वहां आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा,
“यह समस्या केवल सार्वजनिक सुरक्षा की नहीं, बल्कि पर्यटन को भी प्रभावित करती है।”

समुद्र तटों से पकड़े गए कुत्तों को वापस छोड़ना गलत: सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल के सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि समुद्र तटों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जा सकता।

कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों और संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पुराने आदेशों के पालन को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दाखिल किए गए “अस्पष्ट” हलफनामों की कड़ी आलोचना की।

कोर्ट ने पाया कि कई हलफनामों में न तो हटाए गए कुत्तों की संख्या बताई गई है और न ही कुत्ते के काटने की घटनाओं का स्पष्ट डेटा दिया गया है।

राज्यों के दावों पर कोर्ट को संदेह

एमिकस क्यूरी ने आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर कोर्ट को जानकारी दी।

  • असम के हलफनामे में जनशक्ति का कोई ज़िक्र न होने पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई।
  • राज्य द्वारा 2024 में 1,00,066 डॉग बाइट मामलों और जनवरी 2025 में 20,900 मामलों के आंकड़े सामने आने पर जस्टिस मेहता ने हैरानी जताई।
  • झारखंड द्वारा एक लाख से अधिक कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के दावे पर कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा, “यह व्यावहारिक रूप से असंभव लगता है।
  • पश्चिम बंगाल के हलफनामे को कोर्ट ने “पूरी तरह अस्पष्ट” बताया।

महाराष्ट्र की पहल की सराहना

महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्य एक ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित कर रहा है, जो एक महीने में शुरू होगा और कुत्ते के काटने, नसबंदी, टीकाकरण और ABC केंद्रों से जुड़े रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा।

कोर्ट की चेतावनी: अस्पष्ट हलफनामों पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अस्पष्ट और अधूरी जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह नहीं कर सकते, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि संस्थानों की सुरक्षा के लिए हर जगह पक्की चारदीवारी जरूरी नहीं, कई मामलों में बाड़ लगाना भी पर्याप्त हो सकता है।

मामले में शेष राज्यों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की दलीलों पर सुनवाई गुरुवार दोपहर 2 बजे जारी रहेगी।