बिग ब्रेकिंग: गिरफ्तारी लिखित कारणों का नियम भविष्य में ही लागू होगा

गिरफ्तारी के लिखित कारणों का नियम भविष्य में ही लागू होगा

रिपोर्ट- मीनाक्षी सिंह गौर 

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी के कारणों की एक समान लिखित सूचना अनिवार्य करने से जुड़ा कानून भविष्य में ही लागू होगा और इसे पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि केवल लिखित गिरफ्तारी आधार उपलब्ध न कराए जाने मात्र से गिरफ्तारी स्वतः अवैध नहीं हो जाती, जब तक कि इससे आरोपी को वास्तविक और स्पष्ट नुकसान (Prejudice) न हुआ हो।

यह टिप्पणी अदालत ने एक अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया था कि उसे गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं बताए गए, जिससे उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

आरोपी को पहले से थी गिरफ्तारी के आधार की जानकारी

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को शुरू से ही अपनी गिरफ्तारी के आधारों की पूरी जानकारी थी। अभियोजन पक्ष का मामला रिमांड से जुड़े दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज था।

इसके अलावा, हर चरण पर याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्वारा किया गया, जिसमें पुलिस रिमांड की कार्यवाही भी शामिल थी। इन कार्यवाहियों के दौरान पुलिस हिरासत का गुण-दोष के आधार पर विरोध भी किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टेट ऑफ कर्नाटक बनाम श्री दर्शन (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा जताते हुए “पूर्वाग्रह-उन्मुख परीक्षण (Prejudice-Oriented Test)” को लागू किया।

साथ ही अदालत ने कहा की केवल लिखित गिरफ्तारी कारणों की अनुपस्थिति, अपने आप में गिरफ्तारी को गैर-कानूनी नहीं बनाती, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि इससे आरोपी को अपने बचाव का उचित अवसर नहीं मिला और उसे स्पष्ट रूप से नुकसान पहुंचा है।

देरी भी बनी याचिका खारिज होने का आधार

कोर्ट ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता ने गिरफ्तारी के लिखित आधार न मिलने का मुद्दा उठाने में एक साल नौ महीने से अधिक की देरी की। अदालत के अनुसार, इतनी लंबी देरी और किसी स्पष्ट नुकसान के अभाव में याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

याचिका खारिज

इन सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के लिखित कारणों से जुड़ा नियम पुराने मामलों पर लागू नहीं होगा, बल्कि यह आगे होने वाली गिरफ्तारियों पर ही प्रभावी रहेगा।