यौन उत्पीड़न शिकायत के बाद तबादला। हाईकोर्ट ने CDPO वर्षा शर्मा के स्थानांतरण पर लगाई रोक
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुड़की (हरिद्वार) की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) वर्षा शर्मा के तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित कार्यक्रम अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है, क्योंकि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी।
मामले के अनुसार, 5 दिसंबर 2025 को विभाग ने वर्षा शर्मा को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस एक वायरल ऑडियो के आधार पर जारी किया गया, जिसमें पोषण योजना में अनियमितता और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए थे। याचिकाकर्ता ने 10 दिसंबर 2025 को इन आरोपों का विस्तृत जवाब देते हुए उन्हें निराधार बताया था।
याचिका में कहा गया है कि जवाब देने के बावजूद विभाग ने बिना जांच पूरी किए और बिना किसी प्रतिकूल रिपोर्ट के 15 जनवरी 2026 को उन्हें “प्रशासनिक आधार” पर रुड़की से स्थानांतरित कर दिया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि वर्षा शर्मा ने अपने वरिष्ठ अधिकारी (कार्यक्रम अधिकारी) के खिलाफ कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी।
आरोप है कि उस शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग ने उन्हें जांच प्रभावित करने का बहाना बनाकर हटाया।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के तर्कों को गंभीर मानते हुए स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन और संचालन पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।



