राजनीति: उत्तराखंड में राजनीति गरमाई। हरीश रावत के AI वीडियो पर घमासान, कांग्रेस ने तेज किया चुनावी अभियान

उत्तराखंड में राजनीति गरमाई। हरीश रावत के AI वीडियो पर घमासान, कांग्रेस ने तेज किया चुनावी अभियान

देहरादून। उत्तराखंड में भले ही विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं।

कांग्रेस जहां धराली आपदा, वन्यजीव हमले और अन्य जनसरोकार के मुद्दों को लेकर जनाधार मजबूत करने में जुटी थी, वहीं विवादित बयानों और अब एआई (AI) वीडियो ने सियासी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की कमान संभालने के बाद कांग्रेस के अभियान को रफ्तार मिलती दिख रही थी, लेकिन इस बीच हरक सिंह रावत के विवादास्पद बयान और फिर भाजपा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एआई जनरेटेड वीडियो जारी किए जाने से राजनीतिक बहस की दिशा बदल गई है।

उत्तराखंड में भी शुरू हुआ AI राजनीति का दौर

अब तक एआई वीडियो के जरिए राजनीतिक कटाक्ष राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिलते थे, लेकिन उत्तराखंड में भी अब इसका इस्तेमाल शुरू हो गया है। भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही सियासी जंग में एआई तकनीक नया हथियार बनती नजर आ रही है।

हरीश रावत के AI वीडियो पर बवाल

18 दिसंबर को उत्तराखंड भाजपा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक एआई जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया।

वीडियो में कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण और राज्य की डेमोग्राफी बदलने के आरोप लगाए गए। वीडियो में एआई के जरिए हरीश रावत की आवाज और छवि का उपयोग किया गया है।

इस वीडियो में कथित तौर पर हरीश रावत से “मुस्लिम शरणम गच्छामि” जैसे शब्द कहलवाए गए हैं, जबकि अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बुलडोजर के साथ दिखाया गया है।

हरीश रावत का तीखा पलटवार

एआई वीडियो को लेकर हरीश रावत खासे नाराज हैं। उन्होंने भाजपा से वीडियो तुरंत हटाने की मांग की है। ऐसा न होने पर उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने, भाजपा प्रदेश मुख्यालय पर धरना देने और न्याय यात्रा निकालने की चेतावनी दी है।

हरीश रावत ने कहा कि, “भाजपा के लोग झूठे और लब्बार हैं। झूठ की राजनीति अब बर्दाश्त नहीं होगी। कांग्रेस अस्थायी रूप से बेरोजगार है, लेकिन हम भाजपा को उत्तराखंड से स्थायी रूप से बेरोजगार बनाएंगे।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पोस्ट डिलीट नहीं हुई तो वे पुलिस, चुनाव आयोग और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

भाजपा पर कोई असर नहीं

हरीश रावत की चेतावनी के बावजूद भाजपा ने अब तक एआई वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नहीं हटाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का उद्देश्य कांग्रेस को जनमुद्दों से हटाकर डैमेज कंट्रोल में उलझाना था, जिसमें वह फिलहाल सफल होती दिख रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा का भाजपा पर हमला

इधर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा एक दिवसीय दौरे पर हल्द्वानी पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

आलोक शर्मा ने कहा कि,  “उत्तराखंड की भाजपा सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है। खनन, पेपर लीक, बेरोजगारी, पलायन और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब देने में असफल रही है।”

उन्होंने यहां तक कहा कि 2027 के चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विदाई हो सकती है। कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।

आपदा पीड़ितों को अब तक राहत नहीं

राज्य की राजनीति के बीच जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। उत्तरकाशी जिले के नौगांव क्षेत्र में अगस्त माह में हुई अतिवृष्टि से प्रभावित नगर पंचायत के पीड़ितों को साढ़े चार माह बाद भी राहत राशि नहीं मिल पाई है।

अतिवृष्टि से वार्ड नंबर 5, 6 और 7 में भारी नुकसान हुआ था। खेतों में मलबा भर गया, दुकानों और मकानों में पानी घुस गया। नगर पंचायत प्रशासन ने करीब 15 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों के नुकसान का दावा किया था।

पीड़ित काश्तकार गब्बर सिंह और सरदार सिंह का कहना है कि,  “हमारे घर और खेत तबाह हो गए, लेकिन प्रशासन ने आज तक कोई मदद नहीं की।

वहीं बड़कोट तहसीलदार रेनू सैनी का कहना है कि राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा नुकसान की कोई औपचारिक रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके आधार पर राहत दी जा सके। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सहायता नहीं मिली तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

सियासत बनाम सरोकार

एक तरफ उत्तराखंड में एआई वीडियो को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज है, तो दूसरी ओर आपदा पीड़ित अब भी राहत के इंतजार में हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में राजनीति फिर से जनसरोकारों की ओर लौटेगी, या सियासी शोर ही हावी रहेगा?