गजब: मर्सिडीज कार धोखाधड़ी केस में पुलिस की एफआर खारिज। दोबारा जांच के आदेश

मर्सिडीज कार धोखाधड़ी केस में पुलिस की एफआर खारिज। दोबारा जांच के आदेश

रिपोर्ट- अमित भट्ट
देहरादून। मर्सिडीज बेंज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, पुणे के चेयरमैन, बार्कले मोटर्स देहरादून के निदेशकों और अन्य अधिकारियों पर दर्ज धोखाधड़ी के मामले में पटेलनगर पुलिस द्वारा लगाई गई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को अदालत ने खारिज कर दिया है।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय संदीप सिंह भंडारी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस जांच बेहद सतही और अधूरी रही। कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक पटेलनगर को मामले की पुनः जांच के आदेश दिए हैं।

यह मामला देहरादून निवासी और फिल्म प्रोड्यूसर जय प्रकाश तिवारी से नई कार के नाम पर पुराना मॉडल बेचने से संबंधित है। तिवारी नए मॉडल की मर्सिडीज कारें खरीदने के शौकीन हैं।

वर्ष 2023 में उन्होंने नई मर्सिडीज सी-क्लास 2023 मॉडल बुक कर अपनी पुरानी कार 18 लाख रुपये के घाटे में बेच दी। 24 फरवरी 2023 को उन्हें नई कार डिलीवर की गई, जिसकी इनवॉइस और इंश्योरेंस में निर्माण वर्ष 2023 दर्ज था।

कुछ महीनों बाद जब उन्होंने अपनी कार को नए जीएलसी मॉडल से बदलने की बात शोरूम में की, तो उन्हें बताया गया कि उनकी कार 30% डेप्रिसिएशन में जाएगी। जांच पर पता चला कि जिस कार को नए मॉडल (2023) के रूप में बेचा गया था, वह वास्तव में 2022 मॉडल की निकली।

तिवारी के मुताबिक, शोरूम मैनेजर ने जालसाजी कर एक नया दस्तावेज तैयार किया, जिस पर उनके हस्ताक्षर तक नहीं थे, और उन्हें चुप रहने की धमकी दी गई। जब उन्होंने मर्सिडीज इंडिया के उच्च अधिकारियों को ईमेल भेजकर शिकायत की, तो इसे ‘तकनीकी खामी’ बताकर दबाने का प्रयास किया गया।

जनवरी 2024 में तिवारी की तहरीर पर पुलिस ने मर्सिडीज इंडिया के एमडी संतोष अय्यर, चेयरमैन और शोरूम के अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया। लेकिन लंबे समय तक चली जांच के बाद पुलिस ने केस में एफआर लगाकर मामला बंद कर दिया।

हालांकि अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि-

  • पुलिस की जांच अधूरी रही।
  • सभी प्रमाण शिकायतकर्ता ने स्वयं दिए।
  • पुलिस ने सिर्फ औपचारिकता निभाई।

अब अदालत के आदेश के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की पुनः जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इस कथित धोखाधड़ी में जिम्मेदार लोग कानून के दायरे में आते हैं।