बिग ब्रेकिंग: सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत। पदोन्नति में 50% शिथिलीकरण का नया प्रावधान लागू

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत। पदोन्नति में 50% शिथिलीकरण का नया प्रावधान लागू

देहरादून। राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उत्तराखण्ड सरकारी सेवक पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण नियमावली, 2025 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। नई संशोधित नियमावली तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

संशोधन के तहत नियम 4 को पूर्ण रूप से प्रतिस्थापित किया गया है। इसके अनुसार, पदोन्नति हेतु निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि में 50 प्रतिशत तक की शिथिलता प्रदान करने की प्रक्रिया में अब महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन किया गया है।

क्या है नया प्रावधान?

यदि किसी पद पर पदोन्नति के लिए पात्र कर्मचारियों की संख्या अपेक्षित संख्या से कम हो, तो—

समूह ‘ग’ सेवा संवर्ग के कर्मचारियों के लिए

  • अब शिथिलीकरण का निर्णय संबंधित विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति की संस्तुति पर होगा।
  • समिति में वित्त नियंत्रक तथा विभागाध्यक्ष द्वारा नामित एक अन्य अधिकारी सदस्य होगा।
  • शिथिलीकरण में परिवीक्षा अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
  • शेष अर्हकारी सेवा अवधि में अधिकतम 50% शिथिलीकरण दिया जा सकेगा।

महत्वपूर्ण अतिरिक्त संशोधन

यदि किसी सेवा नियमावली में पदोन्नति हेतु-

  1.  न्यूनतम अर्हकारी सेवा, और
  2. अधीनस्थ पदों पर कुल सेवा अवधि,

दोनों का प्रावधान है, तो—

  • अर्हकारी सेवा में 50% शिथिलता देने पर
  • उसी अवधि की शिथिलता अधीनस्थ पदों पर आवश्यक कुल सेवा अवधि में भी दी जाएगी।

सरकार द्वारा दिए गए उदाहरण से समझें

यदि:

  • पद ‘क’ से पद ‘ख’ पर पदोन्नति हेतु न्यूनतम सेवा 6 वर्ष (जिसमें 2 वर्ष की परिवीक्षा शामिल) आवश्यक है।
  • तथा अधीनस्थ पदों पर कुल 18 वर्ष की सेवा अनिवार्य है।

तो:

  • परिवीक्षा अवधि हटाकर (6-2)=4 वर्ष शेष
  • 4 वर्ष का 50% = 2 वर्ष शिथिलीकरण

इस प्रकार

  • अर्हकारी सेवा 6 वर्ष के बजाय 4 वर्ष स्वीकार्य
  • अधीनस्थ पदों पर कुल सेवा अवधि 18 वर्ष के बजाय 16 वर्ष मान्य
  • ठीक नीचे के पद पर सेवा अवधि 4 वर्ष अनिवार्य

इस संशोधन का प्रभाव

नया प्रावधान विभागों को पदोन्नति प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करने में मदद करेगा, खासकर वहां जहां योग्य कर्मियों की कमी रहती है। साथ ही, विशेषज्ञ समिति की भूमिका से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह बन जाएगी।