हाईकोर्ट ने अवैध रूप से संचालित 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने के दिए निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गंगा नदी में अवैध खनन के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए हरिद्वार जिले में अवैध रूप से संचालित 48 स्टोन क्रशरों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने मातृ सदन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अगली सुनवाई की तारीख 12 सितंबर तय की गई है।
अदालत ने जताई सख्त नाराजगी
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि पूर्व में 3 मई 2024 को भी स्टोन क्रशरों को बंद करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद ये क्रशर संचालन में बने रहे, जो न्यायालय के आदेश की सीधी अवहेलना है। यह कानून का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया।
प्रशासन को ठोस कार्रवाई के निर्देश
खंडपीठ ने हरिद्वार के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि वे इन 48 क्रशरों की बिजली और पानी की आपूर्ति तत्काल बंद करें और इनका संचालन रोका जाए। साथ ही इस कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
गंगा नदी के अस्तित्व पर संकट
जनहित याचिका में मातृ सदन के स्वामी दयानन्द ने अदालत को अवगत कराया कि गंगा नदी में बड़े पैमाने पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन किया जा रहा है। इससे नदी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है और ‘नमामि गंगे’ जैसी योजनाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
याचिका में मांग की गई कि गंगा में हो रहे अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि इसकी पवित्रता और पारिस्थितिकी को संरक्षित किया जा सके।
यह मामला उत्तराखंड में गंगा की रक्षा को लेकर लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। उच्च न्यायालय के निर्देशों से उम्मीद है कि प्रशासन अब सक्रियता से अवैध खनन पर नकेल कस पाएगा।



