CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 1377 अपात्र लाभार्थियों पर गिरी गाज
देहरादून। उत्तराखंड में समाज कल्याण योजनाओं के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर बड़ा खुलासा हुआ है। Comptroller and Auditor General of India (CAG) की जांच में सामने आया है कि राज्य में 1,377 ऐसे लोग, जो विभागीय सेवा से रिटायर होने के बाद नियमित सरकारी पेंशन ले रहे थे, वे साथ ही वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भी लाभ उठा रहे थे।
आधार लिंकिंग में खुली पोल
समाज कल्याण विभाग द्वारा आधार लिंकिंग और डिजिटल डेटा मिलान की प्रक्रिया के दौरान सामाजिक पेंशन सूची को सरकारी पेंशनर्स के डेटाबेस से क्रॉस-चेक किया गया।
इसी प्रक्रिया में दोहरी पेंशन के मामले सामने आए। जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि कुछ मामलों में मृतक व्यक्तियों के नाम पर भी पेंशन जारी रही।
धामी सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल प्रभाव से सभी अपात्र लाभार्थियों की सामाजिक पेंशन फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि,
- अवैध रूप से ली गई धनराशि की रिकवरी की जाएगी
- दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी
- संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी
- मुख्यमंत्री ने इसे जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ विश्वासघात करार दिया है।
क्या कहते हैं नियम?
राज्य सरकार के नियमों के अनुसार जो व्यक्ति सरकारी सेवा से पेंशन प्राप्त कर रहा है, वह समाज कल्याण विभाग की अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का पात्र नहीं है। ये योजनाएं केवल निर्धन, निराश्रित और आयविहीन लोगों के लिए हैं।
आगे की रणनीति
सरकार ने भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए ‘एकीकृत पेंशन पोर्टल’ विकसित करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इस पोर्टल के जरिए सभी पेंशन योजनाओं का डेटा एक मंच पर उपलब्ध रहेगा और दोहरी पेंशन की संभावना को रोका जा सकेगा।
यह कार्रवाई सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी पर प्रहार नहीं, बल्कि उन वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकार की रक्षा का प्रयास है जिनके हिस्से की सहायता पर अवैध कब्जा किया गया था।



