बिग ब्रेकिंग: प्रदेश में वर्ग-3 एवं वर्ग-4 भूमि विनियमन की अवधि पुनः बढ़ी
– पूर्व में शुल्क जमा करने वालों को राहत, जिलाधिकारियों को प्राथमिकता से निस्तारण के निर्देश
रिपोर्ट- मयंक पंत
प्रदेश सरकार ने वर्ग-3 एवं वर्ग-4 श्रेणी की भूमि के विनियमन (रेगुलराइजेशन) को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इसकी अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है।
राजस्व अनुभाग-2 द्वारा जारी नवीन शासनादेश संख्या 245/XVII(II)/26 दिनांक 12 फरवरी 2026 के माध्यम से यह व्यवस्था प्रभावी कर दी गई है।
सरकार के इस फैसले से उन हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने पूर्व में विनियमन हेतु शुल्क जमा किया था लेकिन विभिन्न कारणों से उनके प्रकरण लंबित रह गए थे।
क्या है पूरा मामला
पूर्व में शासनादेश संख्या-958/ XVIII(II)/2020-07(46)/2008, दिनांक 02 नवम्बर 2020 के तहत प्रदेश में वर्ग-4 की भूमि पर अवैध कब्जों एवं पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से विनियमन की व्यवस्था लागू की गई थी।
इस व्यवस्था के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से जमा कर अपनी भूमि का नियमितीकरण कराने का अवसर दिया गया था।
हालांकि, इस शासनादेश के अंतर्गत निर्धारित समयसीमा 02 नवम्बर 2021 को समाप्त हो गई थी। इसके बाद शासनादेश संख्या-1553/ XVIII(II)/2021-07(46)/2008,
दिनांक 16 दिसम्बर 2021 द्वारा अवधि को आगे बढ़ाया गया था, ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा सकें।
अवधि पुनः क्यों बढ़ाई गई
सरकार के संज्ञान में यह बात आई कि अनेक ऐसे आवेदक हैं जिन्होंने निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से जमा कर दिया था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान प्रशासनिक कार्य बाधित रहने के कारण उनके मामलों का अंतिम निस्तारण नहीं हो पाया।
मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शासन ने पुनः अवधि विस्तार का निर्णय लिया है, जिससे—
- शुल्क जमा कर चुके पात्र व्यक्तियों को राहत मिले
- लंबित प्रकरणों का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित हो
- भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आए
जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश
राजस्व विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि—
- पूर्व में शुल्क जमा कर चुके आवेदकों के मामलों की प्राथमिकता से जांच की जाए।
- शासनादेश के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
- लंबित प्रकरणों का शीघ्र एवं नियमानुसार निस्तारण किया जाए।
प्रशासनिक स्तर पर यह भी अपेक्षा की गई है कि अनावश्यक विलंब से बचते हुए पारदर्शिता के साथ प्रक्रिया पूरी की जाए।
हजारों लोगों को मिलेगा लाभ
सरकार के इस निर्णय को भूमि संबंधी विवादों के समाधान और वैधानिक स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे—
- राजस्व विभाग में लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी
- भूमिधारकों एवं पट्टेदारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी
- भूमि स्वामित्व संबंधी अनिश्चितता समाप्त होगी
प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि कोविड काल में प्रभावित नागरिकों के प्रति राहतकारी दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है।



