बिग ब्रेकिंग: नेलांग घाटी भूमि विवाद मामले में हाईकोर्ट ने रक्षा व गृह मंत्रालय समेत कई विभागों से मांगा जवाब

नेलांग घाटी भूमि विवाद मामले में हाईकोर्ट ने रक्षा व गृह मंत्रालय समेत कई विभागों से मांगा जवाब

नैनीताल। चीन सीमा से सटी उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में ग्रामीणों की कथित भूमि कब्जे के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के कई विभागों से जवाब तलब किया है।

यह याचिका जाड़ भोटिया जनकल्याण समिति की ओर से दायर की गई है, जिस पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद सेना ने नेलांग घाटी को अपने नियंत्रण में ले लिया और आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।

वर्ष 1990 में भारत सरकार ने नेलांग गांव की 278 नाली भूमिधरी और 18 नाली सरकारी भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी थी, लेकिन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। समिति का आरोप है कि इसके बाद सेना ने भूमि पर कब्जा कर लिया, जबकि ग्रामीणों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया।

संयुक्त सर्वेक्षण में खुलासा

साल 2020 में उत्तरकाशी के जिलाधिकारी द्वारा गठित 13 सदस्यीय समिति (जिसमें सेना और अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि भी शामिल थे) की संयुक्त सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आया कि,

  • नेलांग गांव की 6.173 हेक्टेयर भूमिधरी भूमि पर सेना का कब्जा है, जहां भवन और हेलीपैड बनाए गए हैं।
  • जादूंग गांव की 2.807 हेक्टेयर भूमि पर भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सेना और वन विभाग का कब्जा है।

वाइब्रेंट विलेज योजना का मुद्दा

याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2024 में सरकार ने जादूंग गांव को ‘वाइब्रेंट विलेज’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। योजना के तहत 23 होमस्टे विकसित किए जाने हैं। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें भी योजना का लाभ मिले और विकास के साथ उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

हाईकोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने केंद्रीय रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, उत्तराखंड के गृह विभाग, वन सचिव और जनजातीय कल्याण निदेशालय से इस मामले में जवाब मांगा है। अब सभी विभागों को अपना पक्ष अदालत में रखना होगा, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।