फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। FSSAI के कम्प्लायंस एफिडेविट पर जताई नाखुशी
नई दिल्ली। पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक (FOP) वॉर्निंग लेबल अनिवार्य करने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) के ताज़ा कम्प्लायंस एफिडेविट पर असंतोष जताया है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ 3S और आवर हेल्थ सोसाइटी की ओर से दायर PIL में दायर मिसलेनियस एप्लीकेशन पर सुनवाई कर रही थी।
क्या है मामला?
PIL में मांग की गई है कि पैकेज्ड फूड उत्पादों पर शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट के उच्च स्तर की स्पष्ट चेतावनी फ्रंट-ऑफ-पैकेज पर अनिवार्य की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को तुरंत और साफ जानकारी मिल सके।
मुख्य रिट याचिका का निपटारा 9 अप्रैल 2025 को किया गया था, जब कोर्ट को बताया गया कि FSSAI ने Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations, 2020 में संशोधन के जरिए फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। तब कोर्ट ने FSSAI की एक्सपर्ट कमिटी को तीन महीने में सिफारिशें देने का निर्देश दिया था।
FSSAI ने क्या कहा?
30 जनवरी 2026 को जॉइंट डायरेक्टर डॉ. कविता रामासामी द्वारा दायर कम्प्लायंस एफिडेविट में कहा गया कि,
- 2022 में प्रस्तावित इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग मॉडल पर स्टेकहोल्डर्स के बीच सहमति नहीं बन सकी।
- स्टार रेटिंग के एल्गोरिदम की व्यावहारिकता को लेकर चिंता जताई गई।
- बिना मॉडल को लागू किए उसकी व्यवहार्यता का आकलन संभव नहीं।
- फरवरी 2025 में ड्राफ्ट संशोधन जारी किया गया, जिसमें न्यूट्रिशन जानकारी को बोल्ड अक्षरों में प्रदर्शित करने का प्रस्ताव है।
- 24 नवंबर 2025 की 49वीं बैठक में इस मुद्दे को टाल दिया गया।
- आगे रिसर्च, उपभोक्ता सर्वे, ग्लोबल ट्रेंड्स की समीक्षा और MSMEs सहित व्यापक परामर्श की योजना है।
कोर्ट की टिप्पणी
बेंच ने कहा कि प्रथम दृष्टया अब तक की गई कवायद का कोई ठोस या सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
अदालत ने कहा कि यह PIL नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह सुझाव भी रखा गया कि पैकेज्ड फूड के रैपर के सामने ही स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य किया जाए जैसा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित है।
कोर्ट ने FSSAI को इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश देते हुए चार सप्ताह के भीतर नया जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
क्यों अहम है यह मामला?
- भारत में मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग के बढ़ते मामले
- प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता उपभोग
- उपभोक्ता को स्पष्ट और त्वरित जानकारी देने की जरूरत
अब देखना होगा कि FSSAI चार हफ्तों में क्या ठोस कदम और समयबद्ध कार्ययोजना अदालत के सामने रखता है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से संकेत मिल रहे हैं कि स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे पर देरी अब स्वीकार्य नहीं होगी।



