हाईकोर्ट ने ‘जौनसारी’ बनाम ‘जनसारी’ मामले में राज्य सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब
नैनीताल। देहरादून जिले के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के जौनसारी समुदाय की अंग्रेज़ी स्पेलिंग को लेकर उठे विवाद पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
राज्य पुनर्गठन के दौरान केंद्र सरकार के गजट में “JAUNSARI” की जगह “JANSARI” दर्ज हो जाने से समुदाय को केंद्र की योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी आ रही है।
मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में स्पष्ट स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
कोर्ट ने क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि:
- क्या गजट में हुई इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए अब तक कोई ठोस पहल की गई है?
- यदि हां, तो केंद्र सरकार के समक्ष क्या प्रगति हुई?
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक समुदाय के अधिकारों और पहचान से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
क्या है पूरा मामला?
राज्य पुनर्गठन के समय जारी केंद्र सरकार के गजट में “Jaunsari” की स्पेलिंग गलती से “Jansari” हो गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, गजट पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के कारण संशोधन की प्रक्रिया केंद्र सरकार, कैबिनेट निर्णय और राष्ट्रपति की स्वीकृति से ही संभव है।
अब तक न तो केंद्र सरकार ने इस पर संशोधन किया है और न ही राज्य सरकार ने कोई निर्णायक कार्रवाई की है।
जनहित याचिका किसने दायर की?
यह जनहित याचिका मधु चौहान (विकासनगर निवासी) द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस त्रुटि के कारण जौनसारी समुदाय को केंद्र की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बताया गया कि संबंधित आयोग और राज्य सरकार की ओर से केंद्र को पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
क्यों अहम है यह मामला?
- जनजातीय पहचान का सवाल
- केंद्र की योजनाओं से वंचित होने की आशंका
- राज्य पुनर्गठन दस्तावेज़ों में त्रुटि का संवैधानिक पहलू
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब निगाहें राज्य सरकार की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केंद्र स्तर पर इस त्रुटि को सुधारने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाती है या नहीं। फिलहाल, दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें हैं।



