बिग ब्रेकिंग: फायर सीजन शुरू होते ही जलने लगे उत्तराखंड के जंगल

फायर सीजन शुरू होते ही जलने लगे उत्तराखंड के जंगल

उत्तराखंड में फायर सीजन की औपचारिक शुरुआत होते ही जंगलों में आग की घटनाएं सामने आने लगी हैं। फायर सीजन के पहले ही दिन प्रदेशभर से 30 स्थानों पर आग लगने के अलर्ट प्राप्त हुए हैं, जिससे वन विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब गर्मी का प्रभाव अभी पूरी तरह चरम पर भी नहीं पहुंचा है।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार फायर सीजन शुरू होने से पहले ही राज्य में लगभग 42 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर प्रभावित हो चुका है। यह संकेत है कि सूखे मौसम, पत्तियों के अधिक जमाव और मानवीय लापरवाही के कारण जंगलों में आग का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती चरण में ही आग की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में हालात गंभीर हो सकते हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने व्यापक तैयारियां की हैं। प्रदेशभर में 1438 क्रू स्टेशनों को सक्रिय किया गया है, जहां प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती की गई है।

इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में फायर वॉचर और अग्निशमन उपकरण भी तैनात किए जा रहे हैं ताकि किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। विभाग द्वारा कंट्रोल रूम को भी सक्रिय रखा गया है और रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है।

वन अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी निगरानी के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सतर्कता बढ़ाई गई है। फायर वॉचर्स, वन बीट कर्मियों और स्थानीय समुदायों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है।

विशेष रूप से चीड़ बहुल क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है, क्योंकि सूखी पिरुल (चीड़ की पत्तियां) आग को तेजी से फैलाने में सहायक होती हैं।

वन विभाग केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम पर भी जोर दे रहा है। इसके तहत जन जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं, स्कूलों और पंचायत स्तर पर लोगों को जंगल में आग न लगाने और सतर्क रहने की अपील की जा रही है।

विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में जलती हुई बीड़ी-सिगरेट न फेंकें और किसी भी संदिग्ध आग की सूचना तुरंत नजदीकी वन चौकी या कंट्रोल रूम को दें।

विशेषज्ञों के अनुसार जंगल की आग केवल वन संपदा को ही नहीं, बल्कि जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाती है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में आग के बाद भूस्खलन और जल स्रोतों के सूखने का खतरा भी बढ़ जाता है।

फिलहाल वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और दावा कर रहा है कि शुरुआती घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई कर आग को नियंत्रित किया जा रहा है। हालांकि फायर सीजन की शुरुआत में ही बढ़ते मामलों ने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।