बिग ब्रेकिंग: मौसम बदलेगा करवट। पहाड़ों में हल्की बर्फबारी की संभावना, मैदानों में धूप रहेगी बरकरार

मौसम बदलेगा करवट। पहाड़ों में हल्की बर्फबारी की संभावना, मैदानों में धूप रहेगी बरकरार

Weather Update: उत्तराखंड में फिलहाल मौसम स्थिर बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार 16 फरवरी को प्रदेश के सभी जिलों में मौसम शुष्क रहेगा। कहीं भी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं है।

आसमान अधिकांशतः साफ रहेगा और दिन के समय हल्की धूप से लोगों को राहत मिलेगी। हालांकि सुबह और शाम के समय ठंड का असर जारी रहेगा। न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं, जिससे रात और प्रातःकालीन सर्दी सामान्य स्तर पर बनी रहेगी।

17 और 18 फरवरी – ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की गतिविधि

मौसम विभाग के अनुसार 17 और 18 फरवरी को राज्य के पांच पर्वतीय जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है।

संभावित प्रभावित जिलों में-

  • उत्तरकाशी
  • रुद्रप्रयाग
  • चमोली
  • बागेश्वर
  • पिथौरागढ़

इन जिलों में 3300 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हालांकि मैदानी क्षेत्रों और अन्य जिलों में मौसम शुष्क ही रहेगा तथा किसी व्यापक वर्षा की संभावना नहीं है।

दिनवार पूर्वानुमान

  • 17 फरवरी:
    उच्च हिमालयी इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी के आसार, बाकी प्रदेश में मौसम साफ और शुष्क।
  • 18 फरवरी:
    पर्वतीय ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत हल्की वर्षा या बर्फबारी की संभावना, अन्य स्थानों पर सामान्य मौसम।
  • 19 फरवरी:
    प्रदेश के सभी जिलों में पुनः शुष्क मौसम की वापसी, कहीं भी वर्षा या बर्फबारी के संकेत नहीं।

अर्थात दो दिनों की हल्की मौसमी हलचल के बाद एक बार फिर आसमान साफ रहने की संभावना है।

यात्रा और सुरक्षा संबंधी हिदायत

मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को सलाह दी है कि वे प्रस्थान से पहले ताज़ा मौसम अपडेट अवश्य लें। तापमान में गिरावट को देखते हुए पर्याप्त गर्म कपड़ों की व्यवस्था रखें।

संवेदनशील और ऊंचाई वाले पर्वतीय मार्गों पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतें, विशेषकर सुबह और देर शाम के समय जब ठंड और नमी का असर अधिक हो सकता है।

फिलहाल प्रदेश में किसी बड़े मौसमीय व्यवधान के संकेत नहीं हैं, लेकिन पर्वतीय इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।