फर्जी फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वकीलों को दी कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी जजमेंट्स का हवाला देने वाली एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि किसी भी फैसले का हवाला देने से पहले उसे क्रॉस-वेरिफाई करना वकीलों की ड्यूटी है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने संबंधित SLP को खारिज कर दिया और बार के सदस्यों को मौखिक चेतावनी दी।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी के वकील ने बताया कि याचिका में जिन फैसलों का हवाला दिया गया, उनमें से एक फैसला अस्तित्व में ही नहीं था, जबकि अन्य फैसलों में उद्धृत किए गए अंश सही नहीं थे। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में वकीलों और जजों की अतिरिक्त जिम्मेदारी बनती है कि वे देखें कि कोई जजमेंट असली है या “डीप फेक”। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल आर्टिकल के आधार पर जजमेंट उठाना उचित नहीं है, बल्कि मूल (ओरिजिनल) स्रोत से सत्यापन अनिवार्य है।
जस्टिस भुयान ने भी कहा, “आपको क्रॉस वेरिफाई करना चाहिए था, यह वकील की ड्यूटी है।” कोर्ट ने बताया कि हाईकोर्ट के लिए ILR और सुप्रीम कोर्ट के लिए SCR साइटेशन आधिकारिक स्रोत हैं, जिनका उपयोग किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील की माफी स्वीकार करने के बाद कोर्ट ने SLP को बंद कर दिया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह से इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने और जागरूकता बढ़ाने के लिए सम्मेलन आयोजित करने का आग्रह किया।
कोर्ट ने दोहराया कि फर्जी अथॉरिटी का हवाला न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



