तस्करों को 9 साल की सजा, रैश ड्राइविंग की चपेट में डॉक्टर, ट्रक चालक का हाईवे पर तांडव
देहरादून। उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था और सड़क सुरक्षा से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों ने एक साथ सख्त संदेश दिया है। सीमांत जनपद Champawat में चरस तस्करी के मामले में अदालत ने दो दोषियों को 9-9 वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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वहीं Haldwani में तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से वरिष्ठ चिकित्सक गंभीर रूप से घायल हो गए। उधर Lalkuan में नशे में धुत ट्रक चालक ने नेशनल हाईवे पर कई वाहनों को टक्कर मारकर अफरातफरी मचा दी।
चंपावत: चरस तस्करों को 9 साल की सजा
फरवरी 2021 में खेतीखान क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों के पास से करीब 1.83 किलो अवैध चरस बरामद की थी। मामला Lohaghat Police Station में एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुआ था।
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करीब पांच साल तक चले मुकदमे के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने ठोस साक्ष्यों और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती जिलों में मादक पदार्थों की तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हल्द्वानी: रैश ड्राइविंग की चपेट में डॉक्टर
हल्द्वानी के कृष्णा अस्पताल के बाहर देर रात तेज रफ्तार बाइक सवार ने वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरभजन सिंह को टक्कर मार दी। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें बाइक सवार टक्कर मारकर फरार होता दिखाई दे रहा है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल एसएसपी Manjunath TC ने अस्पताल पहुंचकर घायल डॉक्टर का हालचाल जाना और रैश ड्राइविंग पर सख्ती के निर्देश दिए। पुलिस ने ठंडी सड़क समेत संवेदनशील मार्गों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाने और स्पीड ब्रेकर लगाने की बात कही है।
लालकुआं: नशे में ट्रक चालक का हाईवे पर तांडव
नेशनल हाईवे 109 पर खनन सामग्री से लदे ट्रक ने कई वाहनों को टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि चालक नशे में था। हादसे में Kainchi Dham से लौट रहे श्रद्धालुओं की कार भी क्षतिग्रस्त हुई, हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई।
पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में ले लिया है। घटना के बाद कुछ समय के लिए हाईवे पर जाम की स्थिति बन गई।
सख्ती और सवाल दोनों
एक ओर अदालत का सख्त फैसला नशे के खिलाफ मजबूत संदेश देता है, तो दूसरी ओर सड़क पर बढ़ती रैश ड्राइविंग और नशे में वाहन चलाने की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
पुलिस ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं व्यवस्था की चुनौती को भी उजागर करती हैं। प्रदेश में कानून का डर और सड़क पर अनुशासन दोनों की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।



