मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिना केस दर्ज किए पूछताछ का नहीं अधिकार
मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पुलिस बिना किसी विधिवत दर्ज आपराधिक मामले के किसी व्यक्ति को बुलाकर उससे पूछताछ नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 केवल बिना वारंट गिरफ्तारी की परिस्थितियां बताती है, न कि बिना केस दर्ज किए नोटिस जारी करने का अधिकार देती है।
जस्टिस सुंदर मोहन की एकलपीठ ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा एक पत्रकार को जारी नोटिस रद्द कर दिया। पत्रकार को एक लेख में कथित रूप से पुलिस के खिलाफ मानहानिकारक बयान देने के आरोप में स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया था।
कोर्ट ने कहा कि धारा 35(1)(b) सिर्फ यह बताती है कि किन परिस्थितियों में बिना वारंट गिरफ्तारी की जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दर्ज ही नहीं है, तो उसे बुलाने या पूछताछ करने का अधिकार पुलिस को नहीं है।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने भी स्वीकार किया कि मुख्य मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पत्रकार के खिलाफ मानहानि को लेकर कोई अलग एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला दर्ज होता है और जांच के लिए उसकी उपस्थिति आवश्यक होती है, तो पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।
यह फैसला नागरिक अधिकारों और पुलिस शक्तियों की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



