चमोली–उत्तरकाशी में बेकाबू वनाग्नि, फूलों की घाटी रेंज में हालात गंभीर
चमोली जिले के ज्योर्तिमठ अंतर्गत फूलों की घाटी रेंज में बीते चार दिनों से लगी भीषण वनाग्नि पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि वन विभाग ने आग बुझाने में असमर्थता जताते हुए शासन से अतिरिक्त संसाधनों की मांग की है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भारतीय वायु सेना से तत्काल सहायता का अनुरोध किया है।
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन में लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के बीच की पहाड़ियों में आग लगातार फैल रही है। आशंका जताई जा रही है कि चट्टानों से गिरे पत्थरों के आपसी टकराव से निकली चिंगारियों के कारण आग भड़की, जिसे क्षेत्र में मौजूद सूखी झाड़ियां और पेड़ों ने और भयावह बना दिया।
आग दुर्गम और खड़ी पहाड़ियों पर फैली होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। फूलों की घाटी रेंज की वन क्षेत्राधिकारी चेतना कांडपाल के नेतृत्व में वन विभाग की दो टीमें मौके पर तैनात हैं, लेकिन ऊंची-खड़ी पहाड़ियां, गिरते पत्थर और जलते पेड़ राहत कार्यों में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
कई स्थानों पर पहुंचना भी जानलेवा साबित हो रहा है। रेंजर द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि मौजूदा संसाधनों और मानवबल से आग पर नियंत्रण संभव नहीं है।
वन विभाग की रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। जिलाधिकारी ने बताया कि फायर कंट्रोल टीम ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए आग बुझाने में असमर्थता जताई है।
उन्होंने कहा कि फूलों की घाटी विश्व धरोहर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, ऐसे में आग पर शीघ्र नियंत्रण बेहद जरूरी है। शासन को रिपोर्ट भेजकर आईटीबीपी, एसडीआरएफ और भारतीय वायु सेना की मदद मांगी गई है।
उधर, उत्तरकाशी जिले में भी वनाग्नि का कहर जारी है। टकनौर रेंज की पहाड़ियों में लगी आग ने बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है।
पर्यटन स्थल गंगनानी के सामने लगी आग के कारण दिनभर धुएं का घना गुबार छाया रहा, जिससे दृश्यता प्रभावित हुई। गंगोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने का खतरा भी बढ़ गया है। धरासू रेंज के जंगलों में भी आग की घटनाएं सामने आई हैं।
चमोली जिले में केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के काणा खंडरा क्षेत्र के जंगलों में भी आग धधक रही है। हालांकि, वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद चोपता क्षेत्र में लगी आग पर काबू पा लिया है, लेकिन अब भी कई स्थानों पर धुएं का गुबार बना हुआ है।
इसके अलावा थाना गोपेश्वर और फायर सर्विस गोपेश्वर को नर्सिंग कॉलेज पटियालधार के समीप जंगल में भीषण आग की सूचना मिली। आग तेजी से फैलते हुए नर्सिंग कॉलेज की स्टाफ कॉलोनी और आवासीय भवनों तक पहुंच गई, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की नजरें शासन स्तर से होने वाली त्वरित कार्रवाई, हवाई सहायता और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती पर टिकी हैं, ताकि समय रहते आग पर नियंत्रण पाया जा सके और विश्व धरोहर सहित आबादी वाले क्षेत्रों को बचाया जा रहा है।



