राजनीति: भड़ाना के इर्द-गिर्द ‘दलालों की मंडी’, मंगलौर में भाजपा को झटका

भड़ाना के इर्द-गिर्द ‘दलालों की मंडी’, मंगलौर में भाजपा को झटका

रिपोर्ट- सलमान मलिक
मंगलौर। मंगलौर उपचुनाव 2024 के नतीजों ने उत्तराखंड की राजनीति में कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 422 वोटों से मिली हार ने भाजपा के लिए न केवल आत्ममंथन की जरूरत पैदा की है, बल्कि ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ नेतृत्व की बहस को भी फिर से तेज कर दिया है।

हरियाणा से आए दिग्गज नेता करतार सिंह भड़ाना, जिनके पास संसाधन और रसूख की कोई कमी नहीं थी, स्थानीय जनभावनाओं को साधने में नाकाम रहे और कांग्रेस प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन से पराजित हो गए।

चुनावी नतीजों के बाद क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि भड़ाना के इर्द-गिर्द सक्रिय ‘बिचौलियों’ और बाहरी लोगों की भूमिका ने स्थानीय समीकरण बिगाड़ दिए। स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रचार अभियान में जमीनी नेताओं और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया, जबकि निर्णय और रणनीति बाहरी सलाहकारों व निजी स्टाफ के हाथों में रही।

इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी पनपी और इसका सीधा असर मतदान पर पड़ा। भाजपा ने इस उपचुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद प्रचार में उतरे, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

यह हार इसलिए भी चुभती है क्योंकि पार्टी इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंगलौर की जनता ‘चुनावी मौसम’ में आने वाले नेताओं से ज्यादा उस नेतृत्व को प्राथमिकता देती है, जो सालों से क्षेत्र की समस्याओं के साथ खड़ा रहा हो।

पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पुराने और स्थानीय नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं, भड़ाना खेमे की ओर से 2027 की तैयारियों के संकेतों ने गुटबाजी को और हवा दी है।

कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि भाजपा ने ‘पैराशूट कल्चर’ नहीं छोड़ा, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

मंगलौर उपचुनाव की यह हार भाजपा के लिए एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि, सिर्फ धनबल और रसूख से चुनाव नहीं जीते जाते। जनता को ऐसा नेतृत्व चाहिए जिसकी जड़ें स्थानीय मिट्टी में हों।

अब देखना यह है कि क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस संदेश को समझकर रणनीति बदलेगा या फिर ‘अपनों बनाम बाहरियों’ की यह खाई 2027 में और गहरी होगी।