बिग ब्रेकिंग: प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अनियमितता पर हाईकोर्ट सख्त, 11 पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति के आदेश

प्राथमिक शिक्षक भर्ती में अनियमितता पर हाईकोर्ट सख्त, 11 पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति के आदेश

नैनीताल। उत्तराखंड में प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं पर नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना निर्धारित पात्रता के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देना नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने पात्रता के बावजूद नियुक्ति से वंचित रहे 11 याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रूप से नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।

मामले में विनय कुमार सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2016 की सहायक अध्यापक भर्ती में विभाग ने उन अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया, जिनके पास केवल सीटीईटी (CTET) था, जबकि राज्य के नियमों के अनुसार बीएड अभ्यर्थियों के लिए राज्य टीईटी (TET) अनिवार्य थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे बीएड के साथ टीईटी उत्तीर्ण होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रह गए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 2016 की संशोधित सेवा नियमावली के तहत केवल राज्य द्वारा आयोजित टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही प्राथमिक शिक्षक पद के लिए पात्र थे।

कोर्ट ने सचिव और निदेशक की उस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें सीटीईटी और टीईटी को समकक्ष बताया गया था। न्यायालय ने कहा कि विज्ञापन में सीटीईटी धारकों को पात्र मानना वैधानिक नियमों और एनसीटीई (NCTE) की अधिसूचना का उल्लंघन है।

अवैध नियुक्तियों पर सवाल

कोर्ट के समक्ष यह तथ्य भी आया कि सीबीएसई ने वर्ष 2011 के बाद बीएड धारकों को सीटीईटी प्राथमिक स्तर की परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद राज्य के अधिकारियों ने बिना वैधता जांचे नियुक्तियां कर दीं।

कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सरकार से उन अधिकारियों के नाम तलब किए हैं, जिन्होंने इन कथित अवैध नियुक्तियों को अंजाम दिया।

सरकार की दलीलों पर नाराजगी

हाईकोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव बार-बार वही तर्क पेश कर रहे हैं, जिन्हें खंडपीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। कोर्ट ने कहा कि विभागीय अधिकारी पात्र अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और अयोग्य लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।

रिक्त पदों पर होगी नियुक्ति

राज्य में वर्तमान में 2,135 प्राथमिक शिक्षक पद रिक्त हैं। कोर्ट के पूर्व आदेश पर 11 पद रिक्त रखे गए थे। अब न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इन पदों पर याचिकाकर्ताओं की उम्मीदवारी पर विचार कर उन्हें चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति दी जाए। ये नियुक्तियां रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगी।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की है। अगली तारीख पर राज्य सरकार को उन सभी दोषी अधिकारियों का विवरण पेश करना होगा, जिन्होंने वर्ष 2016 की भर्ती प्रक्रिया में अपात्र अभ्यर्थियों को नियुक्त किया था।