‘इंसाफ़ या इंकार?’ दिल्ली दंगे केस में पाँच साल की हिरासत के बाद कल SC देगा जमानत पर फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को दिल्ली दंगों के कथित ‘लार्जर कंस्पिरेसी’ (बड़ी साजिश) मामले में उमर ख़ालिद, शरजील इमाम, गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरा (मेरान) हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था।
ये याचिकाएँ 2 सितंबर के दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसमें दिसंबर 2025 में आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
सभी आरोपी पिछले पाँच वर्षों से अधिक समय से हिरासत में हैं और उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप हैं।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य रूप से लंबी हिरासत, ट्रायल में देरी और हिंसा भड़काने के ठोस सबूतों की कमी को आधार बनाया गया।
1. गुलफ़िशा फ़ातिमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गुलफ़िशा लगभग छह साल से जेल में हैं और समान या उससे भी कम आरोपों में सह-आरोपी देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को 2021 में जमानत मिल चुकी है।
उन्होंने दलील दी कि ‘रेजिम चेंज’ का आरोप मुख्य या किसी भी पूरक चार्जशीट में नहीं है।सिंघवी ने बताया कि गुलफ़िशा की जमानत अर्जी 90 बार सूचीबद्ध हुई, लेकिन कई बार पीठ उपलब्ध न होने या पुनः सूचीबद्ध होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी, जिसे उन्होंने न्याय प्रणाली का “विडंबनापूर्ण चित्र” बताया।
2. उमर ख़ालिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि फरवरी 2020 में दंगों के समय उमर ख़ालिद दिल्ली में मौजूद ही नहीं थे।
अमरावती में दिया गया भाषण अहिंसक, गांधीवादी विरोध की अपील था। सिब्बल ने कहा कि चक्का जाम और रेल रोको जैसे विरोध भारत में आम हैं और इन्हें UAPA के तहत आतंकी कृत्य नहीं कहा जा सकता।
3. शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि जिन भाषणों के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, उन पर अलग मामलों में पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में थे, यानी दंगों से पहले।
केवल भाषण के आधार पर UAPA की धारा 15 (आतंकी कृत्य) लागू नहीं हो सकती। उन्होंने “बौद्धिक आतंकवादी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और निर्दोषता की धारणा पर ज़ोर दिया।
4. शिफा-उर-रहमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि अधिकतम आरोप यह है कि AAJMI अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के लिए धन जुटाया, लेकिन किसी राशि की बरामदगी नहीं हुई।
5. मीरा (मेरान) हैदर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि ट्रायल में देरी अभियोजन पक्ष के कारण हुई। सितंबर 2024 में ही अभियोजन ने जांच पूरी होने की बात कही।
6. शादाब अहमद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के अनुसार आरोपी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं था, बाद में पुलिस ने रुख बदलते हुए उसे साजिशकर्ता बताया।
7. मोहम्मद सलीम ख़ान की ओर से अधिवक्ता गौतम खजांची ने लंबे समय से विचाराधीन कैदियों की रिहाई से जुड़े शाहीन वेलफेयर एसोसिएशन के फैसले का हवाला दिया।
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के सोमवार को आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो लंबे समय से जेल में बंद इन आरोपियों के भविष्य की दिशा तय करेगा।


